Electric Car Sales: भारत के इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल (EPV) बाजार ने 2026 की दूसरी तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है. साइबरमीडिया रिसर्च (CMR) की गुरुवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि में इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल बाजार में सालाना आधार पर 102 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. यह ग्रोथ पैसेंजर व्हीकल (PV) बाजार की कुल 26 प्रतिशत वृद्धि से काफी ज्यादा रही. रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते विकल्प, मॉडल्स की बेहतर उपलब्धता और कुल स्वामित्व लागत के आकर्षक होने से ईवी बाजार को मजबूती मिली है. सीएमआर का अनुमान है कि 2026 के अंत तक भारत के पैसेंजर व्हीकल बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 7-8 प्रतिशत तक पहुंच सकती है.
त्योहारी सीजन और नए मॉडल देंगे बाजार को रफ्तार
सीएमआर के स्मार्ट मोबिलिटी प्रैक्टिस के सीनियर एनालिस्ट अमित शर्मा ने कहा कि भारत का पैसेंजर व्हीकल बाजार 2026 की दूसरी छमाही में स्थिर वृद्धि के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि त्योहारी सीजन, नए मॉडलों की मजबूत लॉन्च पाइपलाइन और SUV तथा फीचर से भरपूर वाहनों की लगातार मांग बाजार की ग्रोथ को सहारा देगी. ऑटो कंपनियों की ओर से लगातार नए मॉडल लॉन्च किए जाने से ग्राहकों के सामने विकल्प बढ़े हैं. वहीं, पेट्रोल की ऊंची कीमतों ने इलेक्ट्रिक वाहनों की कम रनिंग कॉस्ट के फायदे को और आकर्षक बना दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, इन वजहों से कई ICE यानी इंटरनल कम्बशन इंजन वाहन खरीदार इलेक्ट्रिक सेगमेंट की तरफ आकर्षित हुए.
इलेक्ट्रिफिकेशन और डिजिटल फीचर्स बन रहे अहम
CMR की स्मार्ट मोबिलिटी प्रैक्टिस की सीनियर एनालिस्ट शिप्रा सिन्हा ने कहा कि इलेक्ट्रिफिकेशन, सुरक्षा और डिजिटलीकरण अब ऐसे फीचर्स से आगे बढ़कर मुख्यधारा की ग्रोथ के प्रमुख कारक बन रहे हैं, जिनका इस्तेमाल पहले सीमित स्तर पर होता था. उन्होंने कहा कि इस बदलाव में कनेक्टेड वाहन अहम भूमिका निभा रहे हैं. रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2026 के अंत तक कनेक्टेड वाहनों की बाजार हिस्सेदारी 40-45 प्रतिशत तक पहुंच सकती है.
SUV की बाजार हिस्सेदारी 58 प्रतिशत
SUV सेगमेंट ने भी मजबूत प्रदर्शन किया है. रिपोर्ट के अनुसार, SUV की बाजार हिस्सेदारी 58 प्रतिशत रही और इसमें सालाना आधार पर 33 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. SUV की बेहतर ग्राउंड क्लीयरेंस, आकर्षक रोड प्रेजेंस और इन मॉडलों में एडवांस टेक्नोलॉजी तथा सुरक्षा सुविधाओं की बढ़ती उपलब्धता को इसकी प्रमुख वजह बताया गया है.
Connected Cars में 60% की बढ़ोतरी
कनेक्टेड पैसेंजर व्हीकल्स में सालाना आधार पर 60% की वृद्धि दर्ज की गई. इनकी बाजार पहुंच 34 प्रतिशत से बढ़कर 43 प्रतिशत हो गई. रिपोर्ट के मुताबिक, ओवर-द-एयर (OTA) अपडेट, ईवी सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन और रियल-टाइम सुरक्षा एवं डायग्नोस्टिक्स के लिए 4G/5G इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार ने कनेक्टेड वाहनों की मांग बढ़ाने में योगदान दिया.
डिजिटल क्लस्टर और Digital Cockpit की मांग बढ़ी
डिजिटल क्लस्टर वाले पैसेंजर व्हीकल्स में सालाना आधार पर 63 प्रतिशत की वृद्धि हुई. इस फीचर वाले वाहनों की बाजार हिस्सेदारी 35 प्रतिशत से बढ़कर 46 प्रतिशत हो गई. ऑटो कंपनियां डिजिटल क्लस्टर को बड़े पैमाने पर बिकने वाले मॉडलों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहनों में भी शामिल कर रही हैं.
वहीं, डिजिटल कॉकपिट वाले पैसेंजर व्हीकल्स में सालाना आधार पर 58 प्रतिशत की वृद्धि हुई और इनकी बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 38 प्रतिशत हो गई. प्रीमियम और कनेक्टेड इन-केबिन अनुभवों की बढ़ती मांग, बड़े टचस्क्रीन और इंटीग्रेटेड इंफोटेनमेंट सिस्टम के बढ़ते इस्तेमाल ने इस ग्रोथ में योगदान दिया.
Touchscreen और एडीएएस वाले वाहनों की भी बढ़ी मांग
रिपोर्ट के अनुसार, टचस्क्रीन डिस्प्ले वाले पैसेंजर व्हीकल्स में सालाना आधार पर 45 प्रतिशत की वृद्धि हुई. वहीं, एडीएएस यानी एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टमसे लैस वाहनों में 57 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. ADAS से लैस वाहनों में Level-2 सिस्टम की हिस्सेदारी 88 प्रतिशत रही.
30 लाख रुपये से कम कीमत वाले वाहनों का दबदबा
तकनीक और इलेक्ट्रिफिकेशन के तेजी से बढ़ने के बावजूद भारत का पैसेंजर व्हीकल बाजार अभी भी मुख्य रूप से किफायती कीमतों पर केंद्रित है. रिपोर्ट के अनुसार, बाजार की कुल बिक्री में 98 प्रतिशत हिस्सेदारी 30 लाख रुपये से कम कीमत वाले वाहनों की रही. इससे पता चलता है कि नए फीचर्स और इलेक्ट्रिक तकनीक की बढ़ती मांग के बीच किफायती वाहनों का बाजार में दबदबा अभी भी कायम है.
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