India Sugar Export: EU को 5,841 मीट्रिक टन चीनी निर्यात की मंजूरी, जानें क्या है सरकार का फैसला

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

India Sugar Export: भारत के चीनी निर्यातकों के लिए केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लिया है. वित्त वर्ष 2026-27 में भारत को यूरोपीय संघ (EU) के बाजार में 5,841 मीट्रिक टन चीनी निर्यात करने की अनुमति दी गई है. यह निर्यात टैरिफ रेट कोटा व्यवस्था के तहत किया जाएगा. इस फैसले से निर्यातकों को यूरोपीय बाजार में चीनी भेजने के लिए निर्धारित कोटे और व्यापार संबंधी नियमों के तहत काम करने का अवसर मिलेगा.

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की ओर से 9 अक्टूबर को जारी जानकारी के मुताबिक, यह कोटा अक्टूबर 2026 से सितंबर 2027 तक लागू रहेगा. इस अवधि के दौरान निर्धारित मात्रा में ही इस व्यवस्था के तहत चीनी का निर्यात किया जा सकेगा. निर्यात करने वाली कंपनियों को संबंधित नियमों, जरूरी दस्तावेजों और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना होगा.

क्या है टैरिफ रेट कोटा (TRQ) व्यवस्था?

टैरिफ रेट कोटा यानी TRQ एक ऐसी व्यापार व्यवस्था है, जिसके तहत किसी उत्पाद की एक निश्चित मात्रा के आयात या निर्यात पर विशेष शुल्क दर या रियायत लागू हो सकती है. भारत से यूरोपीय संघ को चीनी निर्यात करने के लिए भी इसी व्यवस्था के तहत 5,841 मीट्रिक टन का कोटा निर्धारित किया गया है. इसके तहत लागू शुल्क संबंधी शर्तों और अन्य नियमों के अनुसार व्यापार किया जाएगा.

इस प्रक्रिया में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की भी भूमिका होगी. निर्यात से संबंधित जरूरी प्रमाणपत्रों और दस्तावेजों की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी की जाएगी. संबंधित निर्यातकों को आवश्यक मंजूरी और निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा.

अन्य उत्पादों के व्यापार नियमों में भी बदलाव

चीनी निर्यात के कोटे के अलावा सरकार ने कुछ अन्य उत्पादों से जुड़े व्यापार नियमों में भी बदलाव किए हैं. ग्लूफोसिनेट के आयात पर लागू न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) की अवधि को बढ़ाकर 12 अप्रैल 2027 तक कर दिया गया है. न्यूनतम आयात मूल्य वह निर्धारित कीमत होती है, जिसके आधार पर किसी उत्पाद के आयात को नियंत्रित करने के लिए नियम लागू किए जा सकते हैं.

इस व्यवस्था का उद्देश्य संबंधित उत्पाद के आयात पर निर्धारित शर्तों को लागू करना होता है. इसके अलावा तैयार कल्चर मीडिया के निर्यात से जुड़े प्रावधानों में भी संशोधन किया गया है. इसके तहत जरूरत के अनुसार शिपमेंट क्लीयरेंस सर्टिफिकेट और हेल्थ सर्टिफिकेट जारी किए जा सकेंगे. इन प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल संबंधित देश की आवश्यकताओं और लागू नियमों के अनुसार किया जाएगा.

भारतीय निर्यातकों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

यूरोपीय संघ को चीनी निर्यात के लिए कोटा निर्धारित होने से भारतीय निर्यातकों को आगामी वित्त वर्ष की व्यापार व्यवस्था और निर्धारित निर्यात सीमा के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलेगी. इससे कंपनियां कोटे के अनुरूप अपने निर्यात की योजना तैयार कर सकती हैं और जरूरी दस्तावेजों की प्रक्रिया समय पर पूरी कर सकती हैं. हालांकि, इस फैसले से भारत के कुल चीनी निर्यात या निर्यातकों की कमाई में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह यूरोपीय बाजार की मांग, चीनी की कीमतों, लागू शुल्क संबंधी शर्तों और वास्तविक निर्यात पर निर्भर करेगा.

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