भारत का कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर 2026 की पहली तिमाही में मजबूत उछाल के साथ नई ऊंचाई पर पहुंच गया है. ऑफिस लीजिंग गतिविधि रिकॉर्ड स्तर 21.5 मिलियन स्क्वायर फीट पर पहुंच गई है, जो यह दिखाता है कि भारत अब सिर्फ बैक-ऑफिस हब नहीं, बल्कि ग्लोबल कंपनियों के लिए स्ट्रेटेजिक बिजनेस और इनोवेशन सेंटर बनता जा रहा है.
JLL रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
भारत में ऑफिस स्पेस की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है और इस ट्रेंड को JLL (जेएलएल) की ताजा रिपोर्ट ने भी कन्फर्म किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की पहली तिमाही में कुल ऑफिस लीजिंग 21.5 मिलियन स्क्वायर फीट रही, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर है. खास बात यह है कि इस दौरान सालाना आधार पर 10.2 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की गई, जो बाजार में लगातार बनी हुई डिमांड और कॉर्पोरेट एक्सपेंशन को दर्शाती है.
GCC और फ्लेक्स स्पेस की बढ़ती ताकत
इस ग्रोथ के पीछे सबसे बड़ा रोल ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) और फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस ऑपरेटर्स का रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, कुल लीजिंग में GCC की हिस्सेदारी 45.5 प्रतिशत रही, जबकि फ्लेक्स स्पेस ऑपरेटर्स का योगदान 25.9 प्रतिशत रहा. यह साफ संकेत है कि कंपनियां अब पारंपरिक ऑफिस मॉडल से हटकर ज्यादा फ्लेक्सिबल और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन वर्कस्पेस की ओर तेजी से बढ़ रही हैं.
GCC सेगमेंट में जबरदस्त उछाल
GCC सेगमेंट में खास तौर पर जबरदस्त उछाल देखने को मिला है. इस कैटेगरी में सालाना आधार पर 43 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की गई है और कुल लीजिंग 10 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच गई है. यह बदलाव केवल संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि ग्लोबल कंपनियां भारत में अपनी मौजूदगी को नए स्तर पर ले जा रही हैं और यहां बड़े पैमाने पर हाई-वैल्यू ऑपरेशंस स्थापित कर रही हैं.
एक्सपर्ट की राय
इसी संदर्भ में राहुल अरोरा ने कहा कि ये पारंपरिक बैक-ऑफिस ऑपरेशन नहीं हैं, बल्कि एआई डेवलपमेंट, डिजिटल इंजीनियरिंग और कोर प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर केंद्रित स्ट्रेटेजिक इनोवेशन सेंटर्स हैं. उनका यह बयान साफ तौर पर दिखाता है कि भारत अब केवल सपोर्ट फंक्शन का केंद्र नहीं रहा, बल्कि ग्लोबल इनोवेशन इकोसिस्टम का अहम हिस्सा बन चुका है.
घटती वैकेंसी, बढ़ती डिमांड
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि ऑफिस स्पेस की बढ़ती मांग के चलते देशभर में खाली ऑफिस की दर घटकर 14.7 प्रतिशत पर आ गई है, जो पिछले पांच वर्षों का सबसे निचला स्तर है. इसके साथ ही तिमाही के दौरान नेट एब्जॉर्प्शन 13.7 मिलियन स्क्वायर फीट रहा, जो यह बताता है कि बाजार में नई सप्लाई के मुकाबले डिमांड ज्यादा तेजी से बढ़ रही है.
शहरों में लीजिंग का हाल
अगर शहरों की बात करें तो बेंगलुरु इस रेस में सबसे आगे रहा, जहां कुल लीजिंग वॉल्यूम में 24.8 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की गई. इसके बाद मुंबई 19.5 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर और हैदराबाद 16.8 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रहा. वहीं पुणे की हिस्सेदारी 14.5 प्रतिशत और दिल्ली-एनसीआर की हिस्सेदारी 14.2 प्रतिशत रही, जो इन शहरों में भी मजबूत कॉर्पोरेट एक्टिविटी को दर्शाती है.
बेंगलुरु में GCC का दबदबा
खासतौर पर बेंगलुरु में GCC का दबदबा काफी ज्यादा देखने को मिला, जहां तिमाही के दौरान कुल लीजिंग में इनकी हिस्सेदारी 70 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो पिछले दो वर्षों में सबसे ज्यादा है. यह आंकड़ा बताता है कि बेंगलुरु अभी भी भारत का प्रमुख टेक और इनोवेशन हब बना हुआ है.
किन सेक्टर्स का योगदान
सेक्टर वाइज देखें तो टेक्नोलॉजी और BFSI इंडस्ट्री ने GCC लीजिंग में सबसे ज्यादा योगदान दिया, जबकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भी तेजी से अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है. इसके अलावा ग्लोबल कंपनियों का दबदबा भी कायम रहा, जिन्होंने कुल ऑफिस लीजिंग में 57 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की, जो लगभग पिछले साल के औसत के बराबर है.
यह भी पढ़े: ‘तबाह कर दूंगा तेल की पाइपलाइनें’, ईरानी विदेश मंत्री के रूस पहुंचने पर भड़के ट्रंप