No UPI Day: 2 अक्टूबर को दुकानों पर नहीं चलेगा UPI? जानें क्या है व्यापारियों की मांग

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

No UPI Day: डिजिटल पेमेंट आज आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. किराने की दुकान से लेकर बड़े शोरूम तक, UPI के जरिए भुगतान करना बेहद आसान हो गया है. लेकिन अब इसी डिजिटल पेमेंट व्यवस्था को लेकर व्यापारियों और व्यापारी संगठनों के बीच नाराजगी बढ़ने की बात सामने आई है. UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लगाने के विरोध में व्यापारियों ने आंदोलन का ऐलान किया है. इसी कड़ी में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर ‘नो UPI डे’ मनाने की घोषणा की गई है. इसके तहत व्यापारी UPI से भुगतान स्वीकार नहीं करेंगे और ग्राहकों को कैश या कार्ड से पेमेंट करना पड़ सकता है.

आखिर किस बात को लेकर नाराज हैं व्यापारी?

कारोबारियों का विरोध 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी MDR शुल्क लगाए जाने को लेकर है. उनका कहना है कि पेट्रोल-डीजल, किराना, इलेक्ट्रॉनिक्स और अनाज जैसे कारोबार में पहले से ही मुनाफे का मार्जिन कम रहता है. ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगने से उनकी परिचालन लागत बढ़ सकती है. इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन ने भी इस फैसले के विरोध में चेतावनी दी है.

संगठन का कहना है कि अगर 15 अक्टूबर से पहले यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो वे UPI QR कोड मशीनों को पानी में बहा देंगे. इससे पहले 23 सितंबर को मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर समेत कई शहरों में व्यापारिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया. दी गई जानकारी के मुताबिक, करीब 125 व्यापारिक संगठनों ने ‘नो UPI डे’ मनाया, जिससे राज्य में लगभग 25 फीसदी कारोबार प्रभावित हुआ. महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स और पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन भी इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं.

2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ के समर्थन में कई संगठन

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (MACCIA) के अध्यक्ष रवींद्र मंगवे ने कहा है कि 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ मनाया जाएगा. उन्होंने बताया कि देशभर के व्यापारी संगठनों से बातचीत के बाद महाराष्ट्र के साथ अन्य राज्यों में भी इस विरोध में शामिल होने का फैसला किया गया है. मंगवे के मुताबिक, MACCIA और उससे जुड़े करीब 500 संगठन मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी मांगें रखने की योजना बना रहे हैं.

उन्होंने जिन संगठनों के समर्थन का जिक्र किया, उनमें फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन, ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन, ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन, ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) और अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ (AIEOTF) शामिल हैं.

क्या है MDR शुल्क, जिस पर हो रहा है विरोध?

MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट एक तरह का शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले व्यापारी से लिया जाता है. जब ग्राहक किसी दुकान पर QR कोड स्कैन करके या कार्ड के जरिए भुगतान करता है, तो पैसे को ग्राहक के बैंक खाते से व्यापारी के खाते तक पहुंचाने के लिए बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और अन्य भुगतान नेटवर्क काम करते हैं. इस डिजिटल व्यवस्था के संचालन और भुगतान प्रक्रिया से जुड़ी लागत के लिए MDR लिया जाता है. यह शुल्क सीधे तौर पर सरकार को मिलने वाला टैक्स नहीं है, बल्कि भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों के बीच वितरित किया जाता है.

15 अक्टूबर से लागू होगा नया MDR ढांचा

सरकार के नए फैसले के तहत, 2000 रुपये से ज्यादा के पीयर-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 15 अक्टूबर से 0.40% की फीस लगेगी, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये है. इसका मतलब यह है कि इसका सीधा मतलब यह है कि चाहे ट्रांजैक्शन 1 लाख का हो या 10 लाख का हो, कारोबारी से 300 रुपये से ज्यादा फीस नहीं वसूली जाएगी. टैक्स अमाउंट को 300 रुपये पर ही फ्रीज कर दिया जाएगा.

यह भी पढ़े: ग्रेटर नोएडाः यमुना एक्सप्रेस-वे पर हादसा, आग की गोला बनी बस, जिंदा जले नौ यात्री

Latest News

गाजीपुर में 26 से 28 सितंबर तक लगेगा वृहद स्वास्थ्य शिविर, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक करेंगे शुभारंभ

Ghazipur Health Camp: सेवा संकल्प अभियान के तहत गाजीपुर शहर के लंका मैदान में तीन दिवसीय स्वास्थ्य शिविर का...

More Articles Like This

Exit mobile version