भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) द्वारा रखे गए फिजिकल गोल्ड और सिल्वर के मूल्यांकन से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किया है. नए प्रावधानों के अनुसार अब इन धातुओं की वैल्यू घरेलू बाजार की कीमतों के आधार पर तय की जाएगी, जिसका सीधा असर निवेशकों को मिलने वाले रिटर्न पर पड़ सकता है.
यह नया नियम 1 अप्रैल से लागू होगा. फिलहाल अधिकांश ETF अपने पास मौजूद फिजिकल सोने और चांदी की कीमत तय करने के लिए लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA) की अंतरराष्ट्रीय दरों को आधार मानते हैं.
अब घरेलू स्पॉट कीमतों के आधार पर होगी गणना
कीमत तय करते समय घरेलू मुद्रा विनिमय दर और आयात शुल्क भी शामिल किए जाते हैं, जिसके कारण ETF के पास मौजूद सोने और चांदी की कीमतें अक्सर घरेलू बाजार से अलग दिखाई देती हैं. घरेलू बाजार में चलने वाला प्रीमियम या डिस्काउंट भी अलग होता है, जिसे ETF अपनी NAV गणना में समायोजित करते हैं.
सेबी के नए सर्कुलर के अनुसार अब ETF के पास मौजूद सोने और चांदी की वैल्यू मान्यता प्राप्त घरेलू एक्सचेंज द्वारा निर्धारित स्पॉट कीमतों के आधार पर तय की जाएगी.
निवेशकों के लिए पारदर्शिता और समान रिटर्न
इस निर्णय से विभिन्न ETF में सोने और चांदी के मूल्यांकन में एकरूपता आएगी. बाजार विशेषज्ञ भी इसे सकारात्मक कदम मान रहे हैं. उनका कहना है कि इससे अलग-अलग ETF के NAV और रिटर्न के बीच का अंतर कम होकर अधिक संतुलन दिखाई देगा. साथ ही निवेश प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी, जिससे निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा. हाल के समय में सोना और चांदी दोनों में निवेश की मांग तेजी से बढ़ी है.
केवल जनवरी महीने में गोल्ड ETF में 24,039 करोड़ रुपये और सिल्वर ETF में 9,463 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया. पिछले एक वर्ष में सोने ने 80% से अधिक, जबकि चांदी ने 180% से ज्यादा का शानदार रिटर्न दिया है.
यह भी पढ़े: New GDP Series 2022-23: भारत बदल रहा बेस ईयर, GST डेटा से बदलेगा GDP आकलन