Sri Lanka Energy Crisis: तेल संकट गहराया, रिफाइनरी बंद होने का खतरा, बिजली संकट की आशंका

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब श्रीलंका पर भी साफ दिखाई देने लगा है. देश ने पहले ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और हफ्ते के मध्य में छुट्टी जैसे कदम उठाए हैं. अब लोगों के बीच यह डर बढ़ता जा रहा है कि अगला कदम कहीं बिजली आपूर्ति पर पाबंदी न हो. हालांकि राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की सरकार ने भरोसा दिलाया है कि फिलहाल ऐसी स्थिति नहीं आएगी, लेकिन हालात को लेकर चिंता लगातार बनी हुई है.

रिफाइनरी बंद होने का खतरा

श्रीलंकाई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीलोन पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (CPC) के चेयरमैन डी.जे. राजकरुणा ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि पावर जेनरेशन के लिए जरूरी फर्नेस ऑयल और नैफ्था बनाने वाली रिफाइनरी को कच्चे तेल की कमी के कारण अप्रैल के मध्य तक बंद करना पड़ सकता है.

कच्चे तेल का स्टॉक खत्म होने की कगार पर

डी.जे. राजकरुणा ने सरकारी सूचना विभाग में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि देश में मौजूद कच्चे तेल का स्टॉक सिर्फ अप्रैल के मध्य तक ही रिफाइनरी चलाने के लिए पर्याप्त है. उन्होंने यह भी कहा कि 90,000 टन के दो क्रूड ऑयल शिपमेंट रद्द हो चुके हैं और अगला शिपमेंट अब 19 और 20 जून को आएगा.

बिजली उत्पादन पर असर

राजकरुणा ने कहा कि फर्नेस ऑयल और नैफ्था, जो पावर जेनरेशन के लिए बेहद जरूरी हैं, रिफाइनरी में तैयार होते हैं. रिफाइनरी बंद होने की स्थिति में बिजली उत्पादन के लिए डीजल का सहारा लेना पड़ेगा. उन्होंने स्पष्ट कहा, “रिफाइनरी का बंद होना पावर जेनरेशन के लिए एक गंभीर मुद्दा होगा.”

महंगे डीजल से बनानी होगी बिजली

उन्होंने आगे कहा, “हमें ज्यादा रेट पर डीजल का इस्तेमाल करके बिजली बनानी होगी. हम लोगों से अनुरोध करते हैं कि वे रात में बिजली का कम इस्तेमाल करें. अगर लोग रात में कम से कम एक बल्ब बंद करके, सड़क किनारे लगे साइनबोर्ड और स्ट्रीट लैंप बंद करके हमारा साथ दें, तो हम इसे और भी मैनेज कर सकते हैं.”

इमरजेंसी सप्लाई की कोशिश

सीपीसी ने इमरजेंसी खरीद के तहत फर्नेस ऑयल का ऑर्डर दिया है, जो 12 और 13 अप्रैल तक आने की उम्मीद है. हालांकि, नैफ्था की खरीद संभव नहीं है, इसलिए उसकी जगह डीजल का उपयोग करना पड़ेगा.

प्राइवेट सेक्टर को भी दी छूट

राजकरुणा ने बताया कि प्राइवेट सेक्टर को भी बिना मांग के फ्यूल आयात करने की अनुमति दी गई है. इस दिशा में दो प्रस्ताव पहले ही मिल चुके हैं. उन्होंने कहा, “अगर कोई फ्यूल आयात करने में रुचि दिखाता है, तो वह ऊर्जा मंत्री के सचिव को एक ईमेल भेज सकता है और उसकी कॉपी CPC को भी भेज सकता है. फिर, कैबिनेट द्वारा बनाई गई कमिटी प्रस्ताव का आकलन करेगी और फैसला लेगी. आयात करने वाले को 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर का बॉन्ड देना होगा.”

बिजली दरें बढ़ने की आशंका

कैबिनेट प्रवक्ता और मंत्री नलिंडा जयतिस्सा ने कहा कि पब्लिक यूटिलिटीज कमीशन ऑफ श्रीलंका (PUCSL) 1 अप्रैल तक बिजली दरों में बढ़ोतरी की घोषणा कर सकता है.

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