New Delhi: इस साल मई से जून तक भीषण गर्मी के कारण देश भर में लगभग 10 में से 7 बच्चे स्कूल नहीं जा पाए या अपनी रोजमर्रा की गतिविधियां नहीं कर पाए. लगभग 63 प्रतिशत बच्चों ने डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) की समस्या बताई, 51 प्रतिशत को सिरदर्द हुआ और 44 प्रतिशत ने भीषण गर्मी के दौरान बहुत ज़्यादा थकान महसूस की. यह दावा एक नई रिपोर्ट में किया गया है.
3,096 स्कूली बच्चों की राय
बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था CRY के एक सर्वे पर आधारित इस रिपोर्ट का शीर्षक है “फीलिंग द हीट: चिल्ड्रन्स वॉयस ऑन हीट, वेल-बीइंग एंड लर्निंग इन इंडिया”. इसमें 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 10-17 साल की उम्र के 3,096 स्कूली बच्चों की राय ली गई. रिपोर्ट में कहा गया -“88 प्रतिशत बच्चों को लगा कि इस साल की गर्मी पिछले सालों की तुलना में ज़्यादा थी.
ध्यान केंद्रित करने की क्षमता पर बुरा असर
लगभग 68 प्रतिशत बच्चों ने बताया कि गर्मी से जुड़ी दिक्कतों के कारण वे स्कूल नहीं जा पाए या अपनी रोज़मर्रा की गतिविधियां नहीं कर पाए, जबकि 76 प्रतिशत ने कहा कि गर्मी ने पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने की उनकी क्षमता पर बुरा असर डाला. लगभग 47 प्रतिशत बच्चों ने दोपहर के समय को दिन का सबसे मुश्किल हिस्सा बताया और 45 प्रतिशत से ज़्यादा ने कहा कि स्कूल के समय में उन्हें काफ़ी परेशानी हुई, जिससे पता चलता है कि बढ़ती गर्मी में पढ़ाई करते समय बच्चों को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.
चुनौतियां सिर्फ़ स्कूल तक ही सीमित नहीं
गर्मी से जुड़ी चुनौतियां सिर्फ़ स्कूल तक ही सीमित नहीं रहीं, बल्कि बच्चों के घरों तक भी पहुंचीं. सर्वे में शामिल आधे से ज़्यादा (53 प्रतिशत) लोगों ने बताया कि अक्सर बिजली चली जाती है या घर बहुत गर्म हो जाते हैं, जबकि लगभग 10 में से 3 लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ा, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई और उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर असर पड़ा.
बार-बार हीटवेव की स्थिति बनी
भारत में गर्मियों के दौरान बार-बार हीटवेव (लू) की स्थिति बनी और कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया. कई इलाकों में स्कूलों ने अपना समय बदला, आउटडोर गतिविधियां कम कीं और कुछ जगहों पर तो कुछ समय के लिए क्लास भी बंद कर दीं. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ‘एनुअल क्लाइमेट स्टेटमेंट 2025’ के अनुसार, 2024 भारत में 1901 के बाद से अब तक का सबसे गर्म साल रहा, जबकि 2016-2025 का दशक अब तक का सबसे गर्म दशक रहा, जिसमें सबसे गर्म 15 सालों में से 10 साल इसी दौरान आए.
भीषण गर्मी का असर एक जैसा नहीं होता
सर्वे में भीषण गर्मी से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बढ़ते बोझ की ओर भी इशारा किया गया. नतीजों से यह भी पता चला कि भीषण गर्मी का असर हर किसी पर एक जैसा नहीं होता. दिहाड़ी मज़दूरी या शारीरिक मेहनत करने वाले परिवारों के लगभग 71 प्रतिशत बच्चों ने गर्मी से जुड़ी गंभीर परेशानी बताई, जबकि दूसरे परिवारों के 46 प्रतिशत बच्चों ने ऐसा कहा. इससे पता चलता है कि जलवायु से जुड़े जोखिम आर्थिक रूप से कमज़ोर समुदायों के बच्चों को ज़्यादा प्रभावित करते हैं.
माता-पिता के लिए काम करना मुश्किल
लगभग 59 प्रतिशत बच्चों ने कहा कि गर्मी की वजह से उनके माता-पिता के लिए काम करना मुश्किल हो गया है, जबकि 58 प्रतिशत ने अपने माता-पिता के मूड या व्यवहार में बदलाव देखा. 43 प्रतिशत बच्चों ने घर में तनाव या चिड़चिड़ापन बढ़ने की बात कही, जिससे पता चलता है कि भीषण गर्मी का असर सिर्फ़ शारीरिक परेशानी तक सीमित नहीं है, बल्कि पारिवारिक जीवन पर भी पड़ता है.
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