₹1,500 करोड़ के सुपारी सिंडिकेट पर ED का बड़ा एक्शन, काली कमाई से खरीदे आलीशान बंगले, 4 राज्यों में 20 ठिकानों पर रेड

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

ED Raid: भारत-म्यांमार सीमा के रास्ते विदेशी सुपारी की तस्करी और उससे हुई काली कमाई को सफेद करने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने बड़ी कार्रवाई की है. एजेंसी की गुवाहाटी जोनल यूनिट ने असम, मिजोरम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में एक साथ 20 ठिकानों पर छापेमारी की. जांच एजेंसी के मुताबिक, यह मामला एक बड़े और संगठित नेटवर्क से जुड़ा है, जिसने कथित तौर पर ₹1,500 करोड़ से अधिक की अपराध से अर्जित आय पैदा की.

जांच में तस्करी से लेकर फर्जी बिलिंग, बोगस कंपनियों, हवाला और बैंक खातों के जरिए पैसों की कई परतें बनाने तक का जाल सामने आने का दावा किया गया है. आरोप है कि म्यांमार से अवैध रूप से भारत लाई गई विदेशी सुपारी को कागजों में मिजोरम की घरेलू पैदावार दिखाया जाता था. इसके बाद फर्जी GST इनवॉइस और परिवहन दस्तावेजों के सहारे उसे देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाया जाता था. छापेमारी के दौरान ED ने ₹1.30 करोड़ नकद जब्त किए हैं और 33 बैंक खातों को फ्रीज किया है.

म्यांमार से भारत कैसे लाई जाती थी विदेशी सुपारी?

रिपोर्ट और ED की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, विदेशी मूल की सुपारी को म्यांमार से मिजोरम के चम्फाई-जोखावथार रास्ते के जरिए भारत में लाया जाता था. आरोप है कि सीमा पार से आने वाली इस सुपारी को बाद में घरेलू माल के रूप में दिखाकर देश के दूसरे राज्यों में भेज दिया जाता था. जांच एजेंसी का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क को इस तरह चलाया जा रहा था कि कागजों पर माल की खरीद-बिक्री सामान्य कारोबार जैसी दिखाई दे. इसके लिए अलग-अलग कारोबारी संस्थाओं, बिलों और परिवहन से जुड़े दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता था.

जहां उत्पादन ‘शून्य’, वहीं से दिखाया करोड़ों का कारोबार

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला दावा सुपारी की कथित घरेलू पैदावार को लेकर सामने आया है. आरोप है कि म्यांमार से तस्करी कर लाई गई विदेशी सुपारी को कागजों में मिजोरम के चम्फाई जिले की स्थानीय पैदावार बताया जाता था. जांच के दौरान ED ने केंद्र और राज्य सरकार की संबंधित एजेंसियों से चम्फाई जिले में सुपारी उत्पादन से जुड़े आधिकारिक आंकड़े जुटाए. एजेंसी के मुताबिक, जिन वर्षों के दौरान बड़े स्तर पर कारोबार दिखाया गया, उस अवधि में जिले का घरेलू सुपारी उत्पादन ‘शून्य’ था. इसके बाद संदेह और गहरा गया कि विदेशी सुपारी को स्थानीय पैदावार बताकर उसके असली स्रोत को छिपाया जा रहा था.

फर्जी GST बिल और बोगस कंपनियों का इस्तेमाल

ED की जांच में आरोप लगाया गया है कि तस्करी के माल को कानूनी कारोबार का रूप देने के लिए फर्जी GST इनवॉइस तैयार किए जाते थे. इसके अलावा बोगस कंपनियों और परिवहन से जुड़े कथित झूठे दस्तावेजों का भी इस्तेमाल किया गया. इन दस्तावेजों के जरिए यह दिखाने की कोशिश की जाती थी कि सुपारी की खरीद और बिक्री देश के भीतर सामान्य कारोबारी प्रक्रिया के तहत हुई है. इसी व्यवस्था के सहारे कथित तौर पर विदेशी मूल की सुपारी की पहचान और उसके वास्तविक स्रोत को छिपाया जाता था.

कई राज्यों में फैला था पूरा नेटवर्क

जांच एजेंसी के मुताबिक, इस कथित सिंडिकेट का नेटवर्क केवल सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं था. इसके तार मिजोरम, असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश तक फैले हुए थे. ED की जांच के अनुसार, मिजोरम के चम्फाई की सप्लायर ह्मिंगथानजमी, जो मेसर्स बेकी कुहवा डावर की प्रोपराइटर बताई गई हैं, लालरिनछानी और लालेनकावली की भूमिका सीमा पार से कथित तस्करी के नेटवर्क में सामने आई है.

वहीं एजेंसी ने असम के अबूब अहमद मजुमदार को इस कथित सिंडिकेट का मुख्य सूत्रधार बताया है, जबकि प्रदीप कुमार पाल पर लॉजिस्टिक सपोर्ट उपलब्ध कराने का आरोप है.

पश्चिम बंगाल और वाराणसी तक जुड़े खरीदार और फाइनेंसर

जांच में इस नेटवर्क के खरीदारों और फाइनेंसरों के पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश तक फैले होने का दावा किया गया है. पश्चिम बंगाल के फालाकाटा और नवद्वीप के साथ उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भी इस नेटवर्क से जुड़े लोगों और कारोबारी संस्थाओं की भूमिका की जांच की जा रही है. वाराणसी स्थित मेसर्स शुभ ट्रेडिंग कंपनी और मेसर्स काइमेरा इंफ्रास्ट्रक्चर का नाम भी जांच में सामने आने की बात कही गई है. आरोप है कि खरीदार सीधे सामान्य बैंकिंग चैनल से भुगतान करने के बजाय हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल करते थे.

हवाला ऑपरेटरों तक पहुंचता था पैसा

ED की जांच के मुताबिक, खरीदार असम के सिलचर में सक्रिय हवाला ऑपरेटरों को भुगतान करते थे. इसके बाद पैसों को अलग-अलग खातों और लेनदेन के जरिए आगे बढ़ाया जाता था. आरोप है कि इस व्यवस्था का मकसद पैसों के वास्तविक स्रोत और उन्हें जमा करने वाले लोगों की पहचान छिपाना था. इसके लिए बैंक खातों के जरिए कई स्तरों पर लेनदेन किए जाने का दावा किया गया है.

मिजोरम रूरल बैंक के ट्रांजिट खातों के जरिए लेयरिंग का आरोप

जांच एजेंसी का दावा है कि मिजोरम रूरल बैंक के कुछ ट्रांजिट खातों का इस्तेमाल पैसों की लेयरिंग के लिए किया गया. आरोप है कि इन खातों के जरिए रकम को इस तरह आगे बढ़ाया जाता था, जिससे असली जमाकर्ताओं की पहचान छिपी रहे. इसके बाद पैसा चम्फाई में कथित तस्करों तक पहुंचता था. एजेंसी के मुताबिक, इन खातों से बड़ी मात्रा में नकदी निकाली जाती थी और फिर हवाला के जरिए रकम म्यांमार के सप्लायरों तक भेजी जाती थी.

₹1.30 करोड़ नकद जब्त, 33 बैंक खाते फ्रीज

चार राज्यों में हुई छापेमारी के दौरान ED ने बड़ी मात्रा में नकदी और डिजिटल सबूत जब्त करने का दावा किया है. एजेंसी के मुताबिक, तलाशी के दौरान ₹1.30 करोड़ का बिना हिसाब-किताब वाला कैश मिला. इसके अलावा सुपारी कारोबार से जुड़ी डायरियां, मोबाइल फोन, लैपटॉप और हार्ड ड्राइव भी जब्त किए गए हैं. जांच एजेंसी ने इस नेटवर्क से जुड़े 33 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है.

काली कमाई से महंगी संपत्तियां खरीदने का आरोप

ED की जांच में यह भी दावा किया गया है कि कथित अवैध कमाई का बड़ा हिस्सा रियल एस्टेट में लगाया गया. आरोप है कि नेटवर्क से जुड़े लोगों ने अलग-अलग शहरों में महंगी संपत्तियां खरीदीं और निर्माण कराया. जांच के दौरान चम्फाई, सिलचर, गुवाहाटी, नवद्वीप, फालाकाटा, कोलकाता और वाराणसी में संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिलने की बात सामने आई है. इनमें महंगे इलाकों में बने स्वतंत्र विला और ऊंची इमारतों से जुड़े दस्तावेज भी शामिल बताए गए हैं.

ED ने इन संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज जब्त कर लिए हैं. एजेंसी अब कथित सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों और मददगारों की भूमिका का पता लगाने के लिए आगे की जांच कर रही है.

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