ED Raids: मंगलवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली, हरियाणा और गोवा में कुल 11 जगहों पर एक साथ छापेमारी की.
यह रेड ‘ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स’ और उसके सहयोगी बैंकों के साथ हुई करीब 155.21 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग (काले धन को वैध बनाने) के मामले में की गई है. ईडी की चंडीगढ़ जोनल टीम ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर मंगलवार सुबह-सुबह इन ठिकानों पर झापेमारी की.
किनके ठिकानों पर हुई रेड?
यह छापेमारी ‘महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की कंपनी और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ चल रही जांच के तहत की गई है. अधिकारियों के अनुसार, जिन लोगों के ठिकानों पर रेड पड़ी है, उनमें अशोक मित्तल, सौरभ ढींगरा, भारत भूषण मित्तल, रमन सिंघल और उनके अन्य सहयोगी शामिल हैं. ये ठिकाने हरियाणा के करनाल, दिल्ली और गोवा में स्थित हैं.
क्या है पूरा घोटाला?
ईडी के अनुसार, आरोपियों ने बैंकों के साथ मिलकर एक बहुत ही शातिराना खेल खेला है. आरोपियों ने बैंकों के इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन सिस्टम यानी स्विफ्ट में बिना किसी अनुमति के बदलाव किए. उन्होंने स्विफ्ट के जरिए फॉरेन लेटर्स ऑफ क्रेडिट की रकम को धोखाधड़ी से बढ़ा लिया, लेकिन इसकी एंट्री बैंक के मुख्य सॉफ्टवेयर ‘फिनाकल’ में नहीं की. इस हेराफेरी के कारण ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और उसके साथ जुड़े अन्य बैंकों को करीब 155.21 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ.
CBI की FIR के बाद ईडी की एंट्री
मालूम हो कि इस मामले की शुरुआत सबसे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने की थी. सीबीआई ने महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड, उसके निदेशकों (डायरेक्टर्स) और अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत एफआईआर (एफआईआर) दर्ज की थी. चूंकि मामला करोड़ों के बैंक घोटाले और पैसों की हेराफेरी से जुड़ा था, इसलिए सीबीआई की एफआईआर के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर अपनी जांच और छापेमारी शुरू की है.