यूरोप में गर्मी ने लोगों को किया बेहाल, 22 शहरों में रेड अलर्ट, इन देशों में और बढ़ेगा तापमान

Ved Prakash Sharma
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Europe: पिछले एक हफ्ते से यूरोपीय देशों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ रही है. इससे हर कोई बेहाल हैं. इस भीषण गर्मी की वजह से पूरे महाद्वीप में अब तक सैकड़ों लोगों की मौत हुई है और लोगों के दैनिक जीवन पर खराब असर पड़ा है. साथ ही जंगलों में आग लगने की घटनाओं इजाफा हो गया है.

मौसम वैज्ञानिकों द्वारा यह चेतावनी भी दी गई है कि अगले हफ्ते की शुरुआत से फ्रांस और जर्मनी जैसे देश जहां पिछले कुछ दिनों में गर्मी का सबसे ज्यादा असर देखा गया, वहां गर्मी में फिर से इजाफा होगा.

यूरोप में पिछले एक हफ्ते से जारी रिकॉर्ड तोड़ हीटवेव (लू) ने अब इटली और बाल्कन देशों को अपनी जद में ले लिया है. इटली के उत्तर में बोलजानो से लेकर दक्षिणी द्वीप सिसिली में पलेर्मो तक 22 शहरों में ‘रेड हीट वॉर्निंग’ (भीषण गर्मी की चेतावनी) जारी की गई है.

वेटिकन सिटी में भी बेतहाशा गर्मी का असर

इस बेतहाशा गर्मी का असर वेटिकन सिटी में भी साफ देखने को मिला, जहां ‘सेंट्स पीटर एंड पॉल’ के त्योहार पर पोप लियो का पारंपरिक ‘एंजेलस’ संदेश सुनने के लिए भारी भीड़ उमड़ी थी. चिलचिलाती धूप से बचने के लिए वहां मौजूद तीर्थयात्री लगातार पंखों और छतरियों का सहारा लेते नजर आ रहे हैं.

रेड अलर्ट जारी

वहीं, मौसम विभाग ने क्रोएशिया की राजधानी जगरेब में और पर्यटकों के पसंदीदा शहरों स्प्लिट और डबरोवनिक सहित कई इलाकों के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया. स्प्लिट से करीब 55 किलोमीटर दूर एड्रियाटिक सागर में स्थित ‘विस’ (Vis) द्वीप के चीड़ के जंगलों में भीषण आग लग गई, जिसे बुझाने के लिए दर्जनों दमकलकर्मियों के साथ चार विमानों को तैनात करना पड़ा.

वैज्ञानिकों का कहना है कि 20 जून को शुरू हुई यह गर्मी की लहर यूरोप में अब तक की सबसे भीषण गर्मी की लहर है. इस भीषण गर्मी ने बिजली उत्पादन को बाधित किया है, बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है और स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों पर भारी दबाव डाला है. फ्रांस में इस गर्मी की लहर के दौरान 1,000 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं.

गर्मी फिर बढ़ेगी

इटली की मौसम विज्ञान सोसायटी के अध्यक्ष लुका मर्काली ने कहा कि 5-6 जुलाई से तापमान फिर से बढ़ने की संभावना है. उन्होंने कहा, “प्रभावित इलाके मोटे तौर पर पहली लहर जैसे ही हैं, जिनमें फ्रांस, स्पेन, जर्मनी, इटली, स्विट्जरलैंड और कुछ हद तक ब्रिटेन शामिल हैं.” उन्होंने आगे कहा, “भीषण गर्मी के साथ जंगल की आग का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन यहां भारी बारिश और तूफान की भी संभावना है.”

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