यमन के अहम शहर पर हूतियों ने किया कब्जा: सऊदी अरब की बढ़ेंगी मुश्किलें?

Ved Prakash Sharma
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Houthis capture the Yemeni city of Turbah: दक्षिण-पश्चिमी यमन में एक और अहम इलाके पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने कब्जा कर लिया है. रविवार को तुर्बाह शहर पर कब्जे के बाद हूती अब रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण प्रांतीय राजधानी ताइज की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. यह घटनाक्रम सऊदी अरब समर्थित यमन सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. इसी बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार ने हूतियों के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान का ऐलान किया है. करीब चार साल तक चले युद्धविराम के बाद सऊदी अरब और हूतियों के बीच बढ़े तनाव ने यमन के गृहयुद्ध को एक बार फिर भड़का दिया है.

रविवार को तुर्बाह पर हूतियों का कब्जा हुआ. इसके कुछ ही समय बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार ने हूतियों के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की घोषणा कर दी. तुर्बाह एक अहम सड़क पर स्थित है, जो प्रांतीय राजधानी ताइज को बंदरगाह शहर अदन से जोड़ती है. अदन फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार का अंतरिम केंद्र है.

सरकारी सेना के लिए क्यों अहम हैं तुर्बाह?

पिछले कई वर्षों से तुर्बाह में सरकारी सैनिकों की अहम तैनाती रही है. यहां से वे हूतियों के खिलाफ ताइज की रक्षा करते रहे हैं. ऐसे में शहर का हाथ से निकलना सरकारी बलों के लिए रणनीतिक और सैन्य, दोनों लिहाज से बड़ा नुकसान है. इससे पहले हूतियों ने ताइज के बाहरी इलाकों में कई गांवों और क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था. इन लगातार बढ़तों ने विद्रोहियों के लिए ताइज को चारों तरफ से घेरने का रास्ता खोल दिया है. ताइज यमन का तीसरा सबसे बड़ा शहर है और देश में इसका रणनीतिक महत्व काफी ज्यादा है.

हूतियों की लाल सागर के तट पर भी बड़ी बढ़त

सितंबर की शुरुआत में ईरान समर्थित हूतियों ने लाल सागर के पश्चिमी तट पर तेजी से आगे बढ़ना शुरू किया था. इस अभियान के दौरान उन्होंने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मोखा शहर और लाल सागर के कई द्वीपों पर कब्जा कर लिया. इन इलाकों पर नियंत्रण मिलने के बाद हूतियों का यमन की तरफ से बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य पर नियंत्रण हो गया है.

क्यों इतना अहम है बाब अल-मंदब पर कब्जा?

बाब अल-मंदब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में शामिल है. इस संकरे जलमार्ग से दुनिया के करीब 12 फीसदी वैश्विक व्यापार का आवागमन होता है. इसलिए इस इलाके पर किसी भी सशस्त्र समूह का नियंत्रण क्षेत्रीय संघर्ष के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन सकता है.

बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया यमन सरकार ने

रविवार को जारी बयान में सऊदी समर्थित यमन सरकार ने कहा कि वह सरकार के नियंत्रण वाले इलाकों में सैनिकों की तैनाती और लामबंदी कर रही है. सत्तारूढ़ प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के प्रमुख राशद अल-अलीमी ने टेलीविजन पर दिए भाषण में कहा कि सैन्य अभियान का लक्ष्य हूतियों के कब्जे में बचे इलाकों को वापस लेना है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपनी सरकार को समर्थन देने की अपील भी की.

हूतियों को सऊदी अरब ने दिया सीधा संदेश

अल-अलीमी के ऐलान के कुछ ही घंटे बाद सऊदी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने यमन सरकार की सेनाओं को पूरा सैन्य सहयोग देने का वादा किया. उन्होंने कहा कि हूतियों के खत्म होने तक सऊदी अरब यमन सरकार की सेनाओं को ‘पूरी ऑपरेशनल मदद’ देता रहेगा.

अल-मलिकी ने यह भी कहा कि सऊदी अरब को हूतियों को रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का अधिकार है. हूती पिछले करीब तीन महीने से सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहे हैं. इन हमलों ने दोनों पक्षों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है.

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