Nepal Floods: नेपाल में आई भीषण बाढ़ को कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब भी तबाही का खौफनाक मंजर दिखाई दे रहा है. बिखरे हुए मलबे के बीच जिंदगियां तलाशने का अभियान युद्ध स्तर पर चल रहा है. अभी भी करीब चार हजार लोग लापता हैं और उनकी तलाश जारी है.
रेस्क्यू एजेंसियों के मुताबिक, अब तक करीब 939 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं. इसी कड़ी में मंगलवार को नुवाकोट जिले में रेस्क्यू के दौरान एक दिल की धड़कन बढ़ाने वाली घटना सामने आई.

नेपाल के एक न्यूज वेबसाइट के मुताबिक, नुवाकोट जिले के भोटे कोशी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बिदुर नगर पालिका-10 (वेत्रवंती) में एक ही घर के मलबे से 24 लाशें निकाली गई हैं. नुवाकोट के एसपी बिपिन रेग्मी ने बताया कि बरामद किए गए शवों में 13 महिलाएं, 11 पुरुष और एक बच्चा शामिल है. फिलहाल, शवों की पहचान नहीं हो सकी है और उन्हें पोस्टमार्टम के लिए काठमांडू के त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग अस्पताल भेज दिया गया है.
प्रिंसिपल की सूझबूझ से बच गई छात्रों की जान
त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी के सही समय पर लिए गए फैसले ने करीब 900 छात्रों की जान बचा ली. बाढ़ की चेतावनी मिलते ही प्रिंसिपल दवाड़ी ने तत्काल स्कूल खाली कराया और सभी मौजूद छात्रों को पास की एक सुरक्षित पहाड़ी पर पहुंचा दिया.

कुछ ही देर बाद पानी, कीचड़ और चट्टानों का तेज बहाव स्कूल की पूरी इमारत को बहा ले गया. हादसे के समय स्कूल के 1,643 छात्रों में से करीब 900 कैंपस में मौजूद थे. दुर्भाग्य से स्कूल के दो कर्मचारी समय पर बाहर नहीं निकल सके और वे अभी भी लापता हैं.
आपदा को आए कई दिन बीत गए हैं, लेकिन लापता लोगों की तादाद अब भी हजारों में बनी हुई है. कुल मिलाकर करीब 4,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं. रसुवा जिले के उत्तरगया गांव में ही करीब 350 छात्रों का कोई सुराग नहीं है.
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त्रिशूली 3ए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 40 से 42 इंजीनियर फंसे हुए हैं. आपदा के समय ये सभी काम पर तैनात थे. इस त्रासदी के छठे दिन भी यहां रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू नहीं किया जा सका है.
त्रिशूली 3बी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में हालात और भी गंभीर हैं. प्रोजेक्ट में काम कर रहे इंजीनियर, अन्य अधिकारी और श्रमिकों सहित कुल 118 लोग फंसे हुए हैं. इन लोगों से किसी तरह का कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है.
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मलबे से उठ रही दुर्गंध, महामारी फैलने का खतरा
बाढ़ प्रभावित इलाकों में अब एक नई समस्या खड़ी हो गई है. त्रासदी के सात दिन बाद चारों तरफ दुर्गंध फैलने लगी है. मलबे और दलदल में दबे शवों के सड़ने की वजह से प्रभावित इलाकों में महामारी फैलने का खतरा गहरा गया है. रेस्क्यू एजेंसियों के सामने अब मलबे से शव निकालने के साथ-साथ सैनिटेशन और बीमारियों को रोकने की बड़ी चुनौती है. टीमें लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं.

