Bejing: विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के शासन पर अपने नागरिकों को चीन में काम करने भेजने और उनकी आजादी सीमित करने के गंभीर आरोप लगे हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, अब उत्तर कोरिया की सरकार पहले की तुलना में अधिक संख्या में 40 वर्ष से अधिक उम्र की विवाहित महिलाओं को चीन के जिलिन प्रांत की कपड़ा और समुद्री खाद्य प्रसंस्करण फैक्ट्रियों में भेज रही है. इनमें से कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों को उत्तर कोरिया में छोड़कर जा रही हैं.
उत्तर कोरिया पर नजर रखने वाली समाचार वेबसाइट डेली एनके के चीन स्थित एक सूत्र के अनुसार, इन महिलाओं को आमतौर पर तीन से पांच साल तक विदेश में काम करना पड़ सकता है. लंबे समय तक बच्चों और परिवार से दूर रहने के कारण महिलाओं को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, पहले चीन में काम करने के लिए मुख्य रूप से युवा और अविवाहित महिलाओं को भेजा जाता था. अब विवाहित और मध्य आयु वर्ग की महिलाओं को भेजने की कथित बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.
कुछ पर्यवेक्षकों का मानना है कि इसके पीछे शासन की सोची-समझी रणनीति हो सकती है. उनका अनुमान है कि विवाहित महिलाओं के पति और बच्चों को उत्तर कोरिया में छोड़कर सरकार उनके देश छोड़कर भागने की संभावना कम करना चाहती है. हालांकि, परिवारों को जानबूझकर बंधक की तरह इस्तेमाल करने के इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि चीन पहुंचने के बाद कामगारों के पासपोर्ट जमा करा लिए जाते हैं. इससे उनके लिए अपनी इच्छा से देश छोड़ना या उत्तर कोरिया लौटना मुश्किल हो जाता है.
बच्चे से मिलने के लिए फैक्ट्री से भागी महिला
जिलिन प्रांत के चांगबाई के पास हुई एक घटना का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है. इसके अनुसार, एक उत्तर कोरियाई महिला कपड़ा फैक्ट्री में काम छोड़कर चली गई थी. बताया गया कि उसने अपने बच्चे से मिलने के लिए कई बार घर लौटने की अनुमति मांगी थी. सूत्र के मुताबिक, महिला को तीन दिन बाद पकड़ लिया गया. चीन के राष्ट्रीय दिवस की छुट्टियों के बाद उसे तत्काल उत्तर कोरिया वापस भेज दिया गया. सूत्र ने कहा कि महिला की निजी परिस्थितियों और अपने परिवार से मिलने की उसकी इच्छा पर शायद उचित ध्यान नहीं दिया गया. हालांकि, इस घटना के सभी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है.
उत्तर कोरिया के कामगारों को विदेश भेजने का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों से भी जुड़ा है. दिसंबर 2017 में पारित प्रस्ताव 2397 के तहत सदस्य देशों को उत्तर कोरियाई विदेशी कामगारों को 2019 के अंत तक वापस भेजना था. इसका उद्देश्य उत्तर कोरिया के लिए विदेशी मुद्रा के प्रमुख स्रोतों में से एक को सीमित करना था. इसके बावजूद, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2026 की गर्मियों के दौरान केवल एक महीने में करीब 10,000 उत्तर कोरियाई कामगारों को चीन भेजा गया. यदि यह आंकड़ा सही है, तो यह प्रतिबंधों के बावजूद उत्तर कोरिया और चीन के बीच कामगारों की आवाजाही तथा प्रतिबंधों को लागू करने की चुनौतियों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है.
उत्तर कोरिया लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना कर रहा है. विदेशों में काम करने वाले नागरिकों से होने वाली कमाई शासन के लिए विदेशी मुद्रा का स्रोत बन सकती है, लेकिन विदेश भेजे गए कामगारों की काम करने की परिस्थितियां, उनके दस्तावेजों पर नियंत्रण और परिवार से लंबे समय तक अलगाव मानवाधिकारों से जुड़े गंभीर सवाल उठाते हैं.