West Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 के साथ लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व शुरू हो चुका है. राज्य में पहले चरण के लिए आज मतदान हो रहा है और इसे इस बार बेहद अहम तथा ‘हाई-स्टेक’ मुकाबले के रूप में देखा जा रहा है. सत्ता बरकरार रखने की कोशिश कर रही तृणमूल कांग्रेस और उसे चुनौती दे रही भारतीय जनता पार्टी के बीच कड़ी टक्कर है.
निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने इस बार व्यापक सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था लागू की है.
152 सीटों पर 3.6 करोड़ मतदाता
पहले चरण में पश्चिम बंगाल के 16 जिलों की कुल 152 विधानसभा सीटों पर मतदान हो रहा है. इन सीटों पर करीब 3.6 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. चुनाव आयोग ने इसके लिए लगभग 44,000 मतदान केंद्र बनाए हैं, जहां सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं. इस बार चुनाव प्रक्रिया को छोटा और अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए इसे केवल दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है, जबकि वर्ष 2021 में यह चुनाव आठ चरणों में पूरा हुआ था.
सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम
पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा के इतिहास को ध्यान में रखते हुए इस बार सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त रखी गई है. केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 2,407 कंपनियां तैनात की गई हैं, जिनमें 2.4 लाख से अधिक जवान शामिल हैं. प्रशासन ने 7,384 मतदान केंद्रों को ‘अति संवेदनशील’ घोषित किया है, जहां अतिरिक्त निगरानी और सुरक्षा बल लगाए गए हैं. इसके अलावा, किसी भी अप्रिय घटना से तुरंत निपटने के लिए क्विक रिएक्शन टीम (QRT) को भी पूरी तरह अलर्ट रखा गया है.
दिग्गजों के बीच कड़ा मुकाबला
पहले चरण में कुल 1,478 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं और कई सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार करीब 80 सीटों पर सीधे मुकाबले की स्थिति है, जहां तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी आमने-सामने हैं. वहीं लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस के अलग-अलग चुनाव लड़ने से कई क्षेत्रों में त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति भी बनी है. दार्जिलिंग, मालदा, मुर्शिदाबाद और मिदनापुर जैसे जिलों में मुकाबला विशेष रूप से कड़ा माना जा रहा है.
मतदाता सूची को लेकर विवाद
इस चुनाव में मतदाता सूची को लेकर भी राजनीतिक विवाद सामने आया है. चुनाव आयोग ने लगभग 91 लाख नाम सूची से हटाए हैं, जिनमें मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट मतदाता शामिल बताए गए हैं. इस पर तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि एक खास वर्ग को निशाना बनाया गया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि यह फर्जी वोटरों को हटाने के लिए जरूरी कदम है.
मतदाताओं के लिए आधुनिक सुविधाएं
मतदान प्रक्रिया को आसान और सुगम बनाने के लिए चुनाव आयोग ने इस बार विशेष व्यवस्थाएं की हैं. सभी मतदान केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, ताकि मतदान प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनी रहे. इसके साथ ही दिव्यांग और बुजुर्ग मतदाताओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है, जिसके तहत केंद्रों पर रैंप और अलग कतारों की व्यवस्था की गई है, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े.
इसके अलावा, यदि किसी मतदाता को मतदान के दौरान किसी प्रकार की समस्या होती है, तो वह आयोग द्वारा जारी टोल-फ्री नंबर और ईमेल के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है. इन सभी व्यवस्थाओं का उद्देश्य यही है कि हर मतदाता बिना किसी बाधा के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग कर सके.

