Alcohol Health Risk: रोजाना सिर्फ एक ड्रिंक भी पड़ सकती है भारी, बढ़ सकता है ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों का खतरा

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Alcohol Health Risk: अगर आप यह सोचकर रोजाना थोड़ी मात्रा में शराब पीते हैं कि सिर्फ एक ड्रिंक से सेहत को कोई खास नुकसान नहीं होगा, तो यह खबर आपको चौंका सकती है. एक अध्ययन में सामने आया है कि रोजाना कम मात्रा में शराब पीने से भी ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है. शुरुआत में यह बढ़ोतरी मामूली दिखाई दे सकती है, लेकिन लंबे समय तक ऐसा होने से हृदय और रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे आगे चलकर हार्ट अटैक, स्ट्रोक और दूसरी हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका रहती है.

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के जर्नल हाइपरटेंशन में प्रकाशित इस अध्ययन में अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया के 19,548 लोगों के आंकड़ों को शामिल किया गया. इन लोगों की सेहत पर कई वर्षों तक नजर रखी गई, ताकि यह समझा जा सके कि नियमित शराब पीने और समय के साथ ब्लड प्रेशर में होने वाले बदलाव के बीच क्या संबंध है. शोधकर्ताओं ने पाया कि शराब की मात्रा बढ़ने के साथ सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर में भी बढ़ोतरी हुई.

कम मात्रा में शराब पीने वालों में भी बढ़ा ब्लड प्रेशर

अध्ययन में सामने आया कि शराब की मात्रा और ब्लड प्रेशर के बीच सीधा संबंध है. यानी जैसे-जैसे रोजाना शराब का सेवन बढ़ा, वैसे-वैसे सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई. सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर उस दबाव को दर्शाता है, जो दिल के सिकुड़ने और शरीर में खून पंप करने के दौरान धमनियों की दीवारों पर पड़ता है. शोधकर्ताओं के मुताबिक, कम मात्रा में शराब पीने वाले लोगों में भी ब्लड प्रेशर में हल्की लेकिन लगातार वृद्धि देखी गई.

शुरुआती स्तर पर यह बदलाव बहुत बड़ा नहीं लग सकता है, लेकिन लंबे समय में बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर हृदय और रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है. अध्ययन में शराब सेवन और ब्लड प्रेशर के बदलाव के बीच सकारात्मक संबंध पाया गया.

पुरुषों में डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर पर भी दिखा असर

अध्ययन में यह भी देखा गया कि पुरुषों में डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर बढ़ा, जबकि महिलाओं में इसका प्रभाव उसी तरह स्पष्ट नहीं था. डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर उस दबाव को मापता है, जो दिल की दो धड़कनों के बीच रक्त वाहिकाओं में बना रहता है. शोध के नतीजों के अनुसार, सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर और शराब सेवन के बीच संबंध पुरुषों और महिलाओं दोनों में देखा गया, जबकि डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर से जुड़ा प्रभाव पुरुषों में अधिक स्पष्ट था.

प्रोफेसर मार्को विंसेटी ने क्या कहा?

अध्ययन के प्रमुख लेखक प्रोफेसर मार्को विंसेटी, जो यूनिवर्सिटी ऑफ मोडेना एंड रेजियो एमिलिया से जुड़े हैं और बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में एडजंक्ट प्रोफेसर भी हैं, ने कहा कि उन्हें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि कम मात्रा में शराब का सेवन भी समय के साथ ब्लड प्रेशर में नकारात्मक बदलाव से जुड़ा हो सकता है.

उन्होंने कहा, “हमें कम स्तर पर शराब पीने से कोई लाभकारी प्रभाव नहीं मिला, जब इसकी तुलना शराब न पीने वालों से की गई.” प्रोफेसर विंसेटी ने यह भी कहा कि शराब ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाला एकमात्र कारण नहीं है, लेकिन इसका प्रभाव काफी महत्वपूर्ण है. इसलिए उन्होंने सुझाव दिया कि शराब का सेवन सीमित रखना चाहिए और यदि संभव हो तो इसे पूरी तरह से टालना और भी बेहतर है.

पहले से थोड़ा बढ़ा ब्लड प्रेशर हो तो असर अधिक स्पष्ट

ट्यूलाने यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के प्रोफेसर पॉल व्हेलन, जो वर्ल्ड हाइपरटेंशन लीग के अध्यक्ष भी हैं, ने इस शोध की व्याख्या करते हुए कहा कि जिन प्रतिभागियों का शुरुआती ब्लड प्रेशर पहले से ही थोड़ा बढ़ा हुआ था, उनमें शराब के प्रभाव अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई दिए.

उनके अनुसार, जिन लोगों के शुरुआती ब्लड प्रेशर की रीडिंग अधिक थी, उनमें शराब सेवन और समय के साथ ब्लड प्रेशर में बदलाव के बीच मजबूत संबंध देखा गया. इससे संकेत मिलता है कि जिन लोगों का ब्लड प्रेशर बढ़ने की दिशा में है, उन्हें कम या बिल्कुल शराब न पीने से अधिक लाभ मिल सकता है.

रोजाना 12 ग्राम शराब पर कितना बढ़ा ब्लड प्रेशर?

अध्ययन में पाया गया कि रोजाना औसतन 12 ग्राम शराब का सेवन करने वाले लोगों में सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर औसतन 1.25 एमएमएचजी अधिक दर्ज किया गया. यह तुलना शराब नहीं पीने वालों से की गई थी. वहीं रोजाना लगभग 48 ग्राम शराब का सेवन करने वालों में सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर औसतन 4.9 एमएमएचजी अधिक पाया गया. इससे अध्ययन में शराब की बढ़ती मात्रा और सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर में वृद्धि के बीच संबंध सामने आया.

48 ग्राम शराब लेने वालों में डायस्टोलिक दबाव भी बढ़ा

अध्ययन के अनुसार, रोजाना 12 ग्राम शराब के सेवन पर डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर औसतन 1.14 एमएमएचजी अधिक पाया गया, जबकि 48 ग्राम प्रतिदिन शराब के सेवन पर यह अंतर 3.1 एमएमएचजी तक पहुंच गया. हालांकि, डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर से जुड़ा यह प्रभाव पुरुषों में देखा गया, महिलाओं में नहीं.

केवल शराब ही नहीं, जीवनशैली के दूसरे कारण भी महत्वपूर्ण

अध्ययन से जुड़े निष्कर्षों में यह भी स्पष्ट किया गया कि ब्लड प्रेशर बढ़ने के पीछे शराब अकेला कारण नहीं है. खानपान, शरीर का वजन, शारीरिक गतिविधि और जीवनशैली से जुड़े दूसरे कारक भी ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकते हैं. स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान छोड़ना, कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना और शरीर का वजन संतुलित बनाए रखना हृदय रोगों और स्ट्रोक के खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

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