Asthma Health Tips: अस्थमा के मरीज इन गलतियों से रहें दूर, जरा सी लापरवाही बढ़ा सकती है सांस की परेशानी

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Asthma Health Tips: सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आना, सीने में जकड़न महसूस होना, बार-बार खांसी उठना या थोड़ी सी मेहनत के बाद सांस फूलने लगना… ये समस्याएं अस्थमा के मरीजों की रोजमर्रा की जिंदगी को काफी मुश्किल बना सकती हैं. कई बार मरीज खुद को बिल्कुल ठीक महसूस करता है, लेकिन धूल, धुआं, तेज खुशबू, बदलता मौसम या दवा में लापरवाही अचानक लक्षणों को बढ़ा सकती है. यही वजह है कि अस्थमा में केवल दवा लेना ही काफी नहीं, बल्कि उन चीजों से बचना भी जरूरी है जो परेशानी को ट्रिगर करती हैं.

अस्थमा एक ऐसी बीमारी है, जिसमें सांस की नलियों में सूजन और संकुचन के कारण सांस लेने में परेशानी हो सकती है. हालांकि सही इलाज, नियमित दवाओं और जरूरी सावधानियों की मदद से इसके लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित रखा जा सकता है. अगर आप भी अस्थमा से परेशान हैं, तो रोजमर्रा की कुछ गलतियों से बचना बेहद जरूरी है.

धूल और धुएं को हल्के में न लें

अस्थमा के मरीजों के लिए धूल, सिगरेट का धुआं और वायु प्रदूषण बड़े ट्रिगर साबित हो सकते हैं. इनके संपर्क में आने पर कुछ लोगों में खांसी, घरघराहट या सांस फूलने की समस्या बढ़ सकती है. बाहर ज्यादा प्रदूषण होने पर जरूरत के मुताबिक मास्क का इस्तेमाल किया जा सकता है. वहीं, घर में जमा धूल और एलर्जी पैदा करने वाले कणों को कम करने के लिए नियमित सफाई जरूरी है. अत्यधिक प्रदूषित जगहों पर जाने से बचना भी फायदेमंद हो सकता है.

आराम मिलते ही दवा बंद करना पड़ सकता है भारी

अस्थमा के मरीजों में एक आम गलती यह देखने को मिलती है कि लक्षण कम होते ही वे इनहेलर या दूसरी दवाएं लेना बंद कर देते हैं. कुछ लोग अपनी मर्जी से दवा की मात्रा भी घटा देते हैं. ऐसा करना परेशानी बढ़ा सकता है. डॉक्टर ने जिस समय और जितनी मात्रा में दवा लेने की सलाह दी है, उसी के अनुसार इलाज जारी रखना चाहिए. दवा बंद करने, बदलने या उसकी खुराक में बदलाव का फैसला बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं करना चाहिए.

परफ्यूम और अगरबत्ती भी बढ़ा सकते हैं परेशानी

हर अस्थमा मरीज के ट्रिगर एक जैसे नहीं होते. कुछ लोगों को परफ्यूम की तेज खुशबू से परेशानी हो सकती है, जबकि किसी अन्य व्यक्ति में अगरबत्ती, रूम फ्रेशनर या पेंट की गंध लक्षण बढ़ा सकती है. पालतू जानवरों के बाल भी कुछ लोगों में एलर्जी का कारण बन सकते हैं. इसलिए यह पहचानना जरूरी है कि किन चीजों के संपर्क में आने के बाद खांसी, घरघराहट या सांस लेने की परेशानी बढ़ती है. ट्रिगर की पहचान होने पर उससे दूरी बनाना बेहतर रहता है.

बदलते मौसम में बढ़ा दें सावधानी

अचानक मौसम बदलना, ठंडी हवा और वायरल संक्रमण भी अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं. खासकर मौसम बदलने के दौरान संवेदनशील मरीजों को अतिरिक्त सावधानी रखने की जरूरत होती है. ठंड के समय पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें और शरीर में पानी की कमी न होने दें. भीड़भाड़ वाली जगहों पर संक्रमण से बचाव के जरूरी उपाय अपनाना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वायरल संक्रमण के बाद कुछ मरीजों में सांस से जुड़ी परेशानी बढ़ सकती है.

व्यायाम छोड़ना जरूरी नहीं, लेकिन लापरवाही न करें

अस्थमा होने का मतलब यह नहीं है कि हर तरह की शारीरिक गतिविधि बंद कर दी जाए. हल्का व्यायाम और योग फेफड़ों की क्षमता बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं. हालांकि किस तरह का व्यायाम आपके लिए सही है, यह आपकी स्थिति पर निर्भर करता है. बहुत अधिक मेहनत वाले व्यायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है. अगर एक्सरसाइज करते समय सांस ज्यादा फूलने लगे या परेशानी महसूस हो, तो तुरंत रुक जाना चाहिए.

खानपान, नींद और तनाव का भी रखें ध्यान

अस्थमा को नियंत्रित रखने में स्वस्थ जीवनशैली की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है. संतुलित आहार लेना, पर्याप्त नींद पूरी करना और तनाव को कम करने की कोशिश करना फायदेमंद हो सकता है. वजन बढ़ना भी कुछ लोगों में अस्थमा के लक्षणों को अधिक परेशान कर सकता है. इसलिए वजन को नियंत्रित रखना जरूरी है. इसके साथ ही मरीजों को अपना रेस्क्यू इनहेलर हमेशा पास रखना चाहिए और डॉक्टर द्वारा बताए गए अस्थमा एक्शन प्लान का पालन करना चाहिए.

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