– अमित साटम, भाजपा के मुंबई अध्यक्ष व विधायक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आज प्रस्तुत केंद्रीय बजट में लोक-लुभावन घोषणाओं के बजाय शाश्वत विकास पर केंद्रित दृष्टि स्पष्ट रूप से दिखाई देती है. लगभग 7 प्रतिशत की विकास दर के साथ, भारत कोविड-19 से सबसे तेजी से उबरने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है. इस दौरान लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकालते हुए देशभर में जीवन-स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया गया है, यह हमारी अर्थव्यवस्था की बड़ी उपलब्धि है.
इस बजट में तीन प्रमुख प्राथमिकताएं निर्धारित की गई हैं: आधारभूत संरचना और नवाचार के माध्यम से विकास को गति देना, युवाओं और उद्यमियों को सशक्त बनाकर उनकी आकांक्षाओं को पूरा करना तथा समावेशी प्रगति सुनिश्चित करते हुए ‘सबका साथ, सबका विकास’ के संकल्प को आगे बढ़ाना. भारत की आर्थिक राजधानी के रूप में मुंबई इस संकल्प का केंद्र है. मुंबई के विकास को गति देने के लिए आज के बजट में छह प्रमुख पहलों की घोषणा की गई है.
टीबीएम और ‘पाताल लोक’ परियोजना को राहत:
देश में निर्मित टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) उत्पादकों को कर-रियायतें दिए जाने से मुंबई की महत्वाकांक्षी 70 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग नेटवर्क मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की परिकल्पना वाली ‘पाताल लोक’ परियोजना को सीधा लाभ मिलेगा. आयात पर निर्भरता घटेगी और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा. इससे परियोजना की लागत कम होगी, मेट्रो निर्माण में तेजी आएगी और देश की आत्मनिर्भरता सुदृढ़ होगी.
मुंबई–पुणे हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर:
मुंबई और पुणे उद्योग तथा आर्थिक विकास के राज्य के प्रमुख केंद्र हैं. प्रस्तावित मुंबई–पुणे हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से क्षेत्रीय संपर्क बढ़ेगा, यात्रा समय घटेगा और व्यावसायिक एकीकरण मजबूत होगा. इस मार्ग पर 250 से 320 किमी प्रति घंटे की गति से ट्रेनें चलेंगी. इससे औद्योगिक और सेवा क्लस्टरों को बल मिलेगा तथा राज्य की अर्थव्यवस्था और निवेश को गति मिलेगी.
एमएसएमई के लिए 7 लाख करोड़ की तरलता:
देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्यम (एमएसएमई) को इस बजट में 7 लाख करोड़ रुपये की तरलता सहायता मिलेगी. मुंबई और महाराष्ट्र एमएसएमई के प्रमुख केंद्रों में शामिल हैं. इस बड़े वित्तीय समर्थन से उद्यमियों को आधुनिकीकरण, कामकाज के विस्तार और व्यापक स्तर पर रोजगार सृजन में सहायता मिलेगी. बजट में एमएसएमई को देश के विकास का इंजन बताया गया है.
‘ऑरेंज इकोनॉमी’ को प्रोत्साहन:
मुंबई स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी को समर्थन देना सृजनात्मक उद्योगों में रणनीतिक निवेश है. 15 हजार माध्यमिक विद्यालयों और 500 महाविद्यालयों में विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित होंगी. इससे जेनरेशन-जेड के युवाओं को मीडिया, मनोरंजन और डिजिटल प्लेटफॉर्म में करियर के लिए सक्षम बनाया जाएगा. यह पहल मुंबई को वैश्विक सृजनात्मक राजधानी के रूप में स्थापित करने का अवसर देती है.
मनपाओं को बॉन्ड के लिए प्रोत्साहन:
मनपाओं द्वारा जारी किए जाने वाले प्रत्येक 1,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड पर 100 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन अनुदान दिया जाएगा. इससे शहरी आधारभूत संरचना के लिए संसाधन उपलब्ध होंगे. एशिया की सबसे बड़ी मनपा-बीएमसी के लिए यह बड़ी संभावना है. कॉरपोरेट बॉन्ड्स की तुलना में इनमें डिफॉल्ट का जोखिम कम होता है. जुटाई गई राशि का उपयोग सड़कों, जलापूर्ति और सीवरेज जैसे नागरिक परियोजनाओं में किया जाएगा, जिससे शहर के विकास को सीधा लाभ मिलेगा.
महिला सशक्तिकरण के लिए शी-मार्ट्स:
महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए शी-मार्ट्स की स्थापना उनके द्वारा निर्मित उत्पादों के लिए संगठित बाजार उपलब्ध कराएगी. ‘लखपति दीदी’ पहल के बाद महिलाओं को रोजगार के अवसर देकर आत्मनिर्भर बनाने में शी-मार्ट्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. स्वयं सहायता समूहों में महाराष्ट्र अग्रणी है, इसलिए शी-मार्ट्स का सबसे अधिक लाभ भी महाराष्ट्र को मिलेगा. महिलाओं द्वारा शुरू किए गए छोटे व्यवसायों को स्थिरता मिलेगी और उनके उत्पादों को बड़े स्तर पर बिक्री का मंच प्राप्त होगा.
कुल मिलाकर मोदी सरकार का व्यावहारिक और विकासोन्मुखी बजट भारत की विकास-यात्रा को मजबूती देता है और भारत के विश्वगुरु बनने की दिशा को सुगम बनाता है.

