New Delhi: अब भारतीय रेलवे की वेट एंड वॉच वाली नीति खत्म होने जा रही है और इसकी जगह इंस्टेंट अलॉटमेंट सिस्टम लेने वाला है. पहले नियम के मुताबिक अगर कोई यात्री अपने तय स्टेशन से ट्रेन में नहीं चढ़ता था तो TTE अगले एक या दो स्टेशनों तक उसकी सीट को खाली रखता था. उम्मीद यह रहती थी कि शायद यात्री अगले स्टॉपेज से बोर्ड कर ले. लेकिन अब यह इंतजार खत्म होने वाला है.
सीट ऑटोमैटिकली सिस्टम में दिखने लगेगी खाली
नए सिस्टम के तहत जैसे ही TTE को आपकी सीट खाली दिखेगी, वह अपने हाथ में मौजूद डिजिटल डिवाइस पर उसे नॉट टर्न (यात्री नहीं पहुंचा) मार्क कर देगा. जैसे ही आपकी अनुपस्थिति दर्ज होगी, वह सीट ऑटोमैटिकली सिस्टम में खाली दिखने लगेगी. फिर ट्रेन में पहले से धक्के खा रहे RAC या वेटिंग लिस्ट वाले किसी खुशकिस्मत यात्री के मोबाइल पर तुरंत एक मैसेज पहुंचेगा और आपकी वह सीट पल भर में उसे अलॉट कर दी जाएगी.
TTE को खुशामद करने की जरूरत खत्म
यानी अब न तो TTE को खुशामद करने की जरूरत पड़ेगी और न ही यात्री को उनके पीछे भागना होगा. सारा खेल सॉफ्टवेयर के जरिए पारदर्शी और बिजली की रफ्तार से होगा. हर ट्रेन में औसतन 3 से 5 प्रतिशत यात्री ऐसे होते हैं जो टिकट कन्फर्म होने के बावजूद सफर पर नहीं निकलते. रेलवे की कोशिश है कि एक भी सीट खाली न रहे और जरूरतमंद यात्रियों को तुरंत जगह मिले.
देशभर की ट्रेनों में सीटों का मैनेजमेंट हाई-टेक
इसके लिए रेल सूचना प्रणाली केंद्र सॉफ्टवेयर में बड़े बदलाव कर रहा है, जिससे देशभर की ट्रेनों में सीटों का मैनेजमेंट हाई-टेक हो जाएगा. रेलवे की इस नई सख्ती का सीधा संदेश यह है कि आपने जहां से चढ़ने का टिकट लिया है वहीं से ट्रेन पकड़े. अगर आप अपना बोर्डिंग पॉइंट बदलना चाहते हैं तो यह काम चार्ट बनने से 24 घंटे पहले ही कर लें. चार्ट बनने के बाद न तो आपका स्टेशन बदला जा सकेगा और न ही आप अगले स्टेशन से अपनी सीट पर अपना हक जता पाएंगे.
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