New Delhi: दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (डीजीएचएस) से जुड़े करोड़ों रुपए के कथित घोटाले में पूर्व डीजीएचएस डॉ. वत्सला अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है. डॉ. वत्सला अग्रवाल फिलहाल निलंबित (अंडर सस्पेंशन) चल रही थीं. ACB ने इस मामले में डिप्टी कंट्रोलर अकाउंट्स नीरज चोपड़ा को भी गिरफ्तार किया है. अधिकारियों ने इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी की पुष्टि की.
डॉ. विनोद कुमार रंगा भी गिरफ्तार
जांच एजेंसी का मानना है कि दोनों की भूमिका कथित वित्तीय अनियमितताओं में महत्वपूर्ण हो सकती है. इससे पहले एसीबी इसी मामले में डॉ. विनोद कुमार रंगा को भी गिरफ्तार कर चुकी है. गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी ने उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी, जिसमें कई अहम जानकारियां जुटाई गईं. अब उसी जांच को आगे बढ़ाते हुए एसीबी ने डॉ. वत्सला अग्रवाल और नीरज चोपड़ा को भी गिरफ्तार किया है.
खरीद में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा
यह पूरा मामला दवाइयों, सर्जिकल सामान और मेडिकल उपकरणों की खरीद में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है. यह पूरा मामला करीब 650 करोड़ रुपये की अनियमितता का है. आरोप है कि सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (सीपीए) के माध्यम से कई 650 करोड़ की खरीद प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां की गईं. बताया गया है कि सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (सीपीए), डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (डीजीएचएस) के अधीन काम करती है.
जरूरी सामान की खरीद की जिम्मेदारी
स्वास्थ्य विभाग के लिए दवाइयों, मेडिकल उपकरणों तथा अन्य जरूरी सामान की खरीद की जिम्मेदारी संभालती है. एंटी करप्शन ब्रांच फिलहाल पूरे मामले की गहन जांच कर रही है. जांच के दौरान वित्तीय लेन-देन, खरीद प्रक्रिया में अपनाई गई कार्यप्रणाली और इसमें शामिल अधिकारियों की भूमिका की विस्तार से पड़ताल की जा रही है. एसीबी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित अनियमितताओं के पीछे किन-किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही और सरकारी खरीद प्रक्रिया में नियमों का किस स्तर तक उल्लंघन किया गया.
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