LPG सप्लाई तेज करने के लिए सरकार का बड़ा फैसला, 47 हजार टन गैस लेकर अब वाइजैग पोर्ट पहुंचेगा टैंकर

Vizag port: देश में एलपीजी गैस की सप्लाई तेज करने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. 47 हजार मीट्रिक टन रसोई गैस लेकर आ रहे पाइन गैस टैंकर का रूट बदल दिया गया है. यह 227 मीटर लंबा रेफ्रिजरेटेड एलपीजी शिप फारस की खाड़ी से आया है. मूल रूप से यह न्यू मंगलौर और फिर ओडिशा के धामरा पोर्ट जाने वाला था. अब रूट बदलकर इसे विशाखापत्तनम भेज दिया गया है. कार्गो को जल्दी उतारने और तेज डिलीवरी के लिए यह फैसला लिया गया है. पूर्वी तट के रूट से समय बच रहा है.

वाइजैग पोर्ट पर उतरेगा एलपीजी कार्गो

सरकार ने समय की बचत और तेज वितरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस टैंकर को वाइजैग पोर्ट भेजने का निर्णय लिया है. पहले यह जहाज न्यू मंगलौर और ओडिशा के धामरा पोर्ट पर जाने वाला था, लेकिन नए फैसले के तहत इसे सीधे पूर्वी तट पर लाया जा रहा है. इससे गैस को तेजी से उतारकर देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जा सकेगा.

लंबी यात्रा और बदला गया रूट

यह 227 मीटर लंबा रेफ्रिजरेटेड एलपीजी टैंकर फारस की खाड़ी से रवाना हुआ था. जहाज ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पार किया और पहले गुजरात के वडिनार पोर्ट तक पहुंचा. इसके बाद इसे देश के दक्षिणी सिरे से घूमते हुए बंगाल की खाड़ी के रास्ते पूर्वी तट की ओर भेजा गया. धामरा तक पहुंचने में ज्यादा समय लगता, इसलिए इसे वाइजैग में खाली करने का निर्णय लिया गया.

युद्ध के असर से प्रभावित सप्लाई

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष का असर एलपीजी आपूर्ति पर भी देखने को मिल रहा है. ऐसे हालात में सरकार ने टैंकरों को प्राथमिकता देते हुए वैकल्पिक मार्ग अपनाने शुरू कर दिए हैं. इससे देश में रसोई गैस की कमी न हो और सप्लाई चेन लगातार चलती रहे.

जमीनी नेटवर्क से होगी तेज डिलीवरी

वाइजैग पोर्ट पर गैस उतारने के बाद इसे सड़क और अन्य जमीनी माध्यमों से देश के विभिन्न राज्यों तक पहुंचाया जाएगा. इस रणनीति से वितरण में तेजी आएगी और उपभोक्ताओं तक समय पर एलपीजी पहुंच सकेगी.

पीएनजी कनेक्शन का तेजी से विस्तार

एलपीजी के साथ-साथ सरकार पाइप के जरिए गैस आपूर्ति यानी पीएनजी नेटवर्क का भी तेजी से विस्तार कर रही है. मार्च महीने में 3.1 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं को गैस सप्लाई शुरू की गई, जबकि 2.7 लाख नए कनेक्शन भी जोड़े गए. यह विस्तार घरेलू उपयोग के साथ-साथ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, छात्रावासों और सामुदायिक रसोई तक पहुंच रहा है.

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