Raghu Rai Passes Away: मशहूर फोटोग्राफर रघु राय का 83 साल की उम्र में निधन, भोपाल गैस त्रासदी को अपने कैमरे में किया था कैद

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Raghu Rai Passes Away: मशहूर फोटोग्राफर रघु राय का 26 अप्रैल 2026 को 83 साल की उम्र में निधन हो गया है. सात दशकों तक अपने कैमरे के जरिए देश की आत्मा को दर्ज करने वाले रघु राय के निधन से कला और मीडिया जगत में शोक की लहर है. भोपाल गैस त्रासदी के दर्द को दुनिया के सामने लाने वाली उनकी तस्‍वीर को आने वाले कई दशकों तक याद रखा जाएगा, क्योंकि उस एक फ्रेम में इंसानी त्रासदी, पीड़ा और सच की गहराई साफ दिखाई देती है. इसके अलावा भी उन्होंने कई ऐसी घटनाओं और हस्तियों को अपने कैमरे की लैंस में कैद किया, जो समय के साथ सिर्फ तस्वीर नहीं रहीं, बल्कि इतिहास का हिस्सा बन गईं.

फोटोग्राफी में आने की कहानी

रघु राय का जन्म 1942 में पंजाब के झंग (अब पाकिस्तान में) में हुआ था. साल 1965 में उन्होंने ‘द स्टेट्समैन’ अखबार में फोटो पत्रकार के रूप में अपने करियर की शुरुआत की और 1982 में ‘इंडिया टुडे’ के लिए करीब दस साल तक फोटो संपादक के रूप में काम किया. रघु राय का फोटोग्राफर बनने का सफर किसी तय योजना का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह एक ऐसा मोड़ था जिसने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी. पेशे से सिविल इंजीनियर रहे रघु राय 1960 के दशक में दिल्ली में अपने भाई और प्रसिद्ध फोटोग्राफर एस. पॉल से मिलने आए थे, और यहीं से उनकी रुचि धीरे-धीरे फोटोग्राफी की ओर बढ़ने लगी. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा के एक गांव में ली गई उनकी शुरुआती तस्वीर—कैमरे की ओर सीधे देखता एक गधा—ने उनकी किस्मत बदल दी. यह तस्वीर लंदन के ‘द टाइम्स’ में प्रकाशित हुई और उन्हें न सिर्फ पुरस्कार राशि मिली, बल्कि एक नई पहचान भी मिली, जिसने उन्हें इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया.

फोटोग्राफी का नजरिया और काम

रघु राय के लिए फोटोग्राफी सिर्फ तस्वीर लेना नहीं था, बल्कि वह जीवन को समझने और दिखाने का माध्यम था. उनका मानना था कि फोटो जर्नलिज्म इतिहास का पहला दृश्य प्रमाण होता है, और यही सोच उनके काम में साफ दिखाई देती थी. उन्होंने अपने काम को सिर्फ खूबसूरत फ्रेम तक सीमित नहीं रखा, बल्कि आम लोगों की जिंदगी, उनकी भावनाएं, संघर्ष और सामाजिक सच्चाइयों को अपने कैमरे में उतारा. उनकी तस्वीरों में सिर्फ दृश्य नहीं, बल्कि एक कहानी होती थी, जो देखने वाले को उस पल से जोड़ देती थी. यही वजह है कि उनकी फोटोग्राफी को सिर्फ कला नहीं, बल्कि दस्तावेज की तरह देखा जाता है.

बड़े काम और सम्मान

रघु राय को 1972 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया. अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने भारत के कई अहम और संवेदनशील पलों को अपने कैमरे में दर्ज किया. ऑपरेशन ब्लू स्टार से पहले अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में जरनैल सिंह भिंडरावाले की तस्वीरें, भोपाल गैस त्रासदी के मार्मिक दृश्य और बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान शरणार्थियों की तस्वीरें उनके सबसे चर्चित कार्यों में शामिल हैं. आपातकाल के दौरान, जब सेंसरशिप अपने चरम पर थी, तब भी उन्होंने अपनी रचनात्मकता के जरिए सच्चाई को सामने लाने का रास्ता खोजा. प्रतीकों और संकेतों के माध्यम से उन्होंने उस दौर की वास्तविकता को दुनिया तक पहुंचाया, जो उनके काम की गहराई को दर्शाता है.

अंतरराष्ट्रीय पहचान और प्रभाव

1977 में रघु राय को प्रतिष्ठित मैग्नम फोटोज में शामिल होने का निमंत्रण मिला, जो उन्हें महान फ्रांसीसी फोटोग्राफर हेनरी कार्तिए ब्रेसों की सिफारिश पर मिला था. उनके काम में ब्रेसों की मानवीय दृष्टि की झलक साफ दिखाई देती है, लेकिन उन्होंने अपनी अलग पहचान भी बनाई. फिर चाहे वह पुरानी दिल्ली की गलियां हों, गंगा के घाट या देश के अलग-अलग हिस्सों की तस्वीरें—हर फ्रेम में भारत के जीवन की विविधता और गहराई दिखाई देती थी.

किताबें और विरासत

रघु राय ने कई महत्वपूर्ण किताबें भी लिखीं, जिनमें Delhi, Raghu Rai’s India, Picturing Time और Tibet in Exile शामिल हैं. उनकी पुस्तक Raghu Rai: People (2016) में उन्होंने कई प्रसिद्ध हस्तियों के साथ-साथ आम लोगों के जीवंत चित्र प्रस्तुत किए. इनमें इंदिरा गांधी, उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, दलाई लामा, मदर टेरेसा और सत्यजीत रे जैसी हस्तियां शामिल हैं. जीवन के अंतिम वर्षों में भी रघु राय की फोटोग्राफी के प्रति प्रतिबद्धता कम नहीं हुई. वह लगातार नए विषयों और दृष्टिकोणों के साथ काम करते रहे, जिससे यह साफ होता है कि उनके लिए फोटोग्राफी सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा थी.

एक युग का अंत

रघु राय के निधन के साथ भारतीय फोटोग्राफी और फोटो जर्नलिज्म का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया. हालांकि उनके कैमरे में कैद भारत की तस्वीरें हमेशा जिंदा रहेंगी और आने वाली पीढ़ियों को यह समझने में मदद करेंगी कि एक तस्वीर कितनी गहराई से समय और समाज को बयान कर सकती है.

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