‘हिंदू’ कोई धार्मिक शब्द नहीं, यह राष्ट्रीय और सांस्कृतिक पहचान है- इंद्रेश कुमार

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Indresh Kumar In Bharat Express Conclave: ‘भारत एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क’ के तीसरे स्थापना दिवस पर दिल्ली में आयोजित भव्य ‘भारत एक्सप्रेस मेगा कॉन्क्लेव’ (‘विकसित भारत 2047: नए भारत की बात’) में वैचारिक और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर गहन मंथन हुआ. इस प्रतिष्ठित मंच पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार ऑनलाइन जुड़े.

कॉन्क्लेव के दौरान जब एंकर स्वाति शुक्ला ने उनसे ‘विकसित भारत’ के निर्माण में ‘हिंदू राष्ट्र’ की संकल्पना और उसकी सार्थकता पर सवाल किया, तो इंद्रेश कुमार ने हिंदू शब्द की एक बेहद व्यापक और सर्व-समावेशी (Inclusive) परिभाषा देश के सामने रखी.

‘जैसे अमेरिका के लिए अमेरिकन, वैसे ही हिंद के लिए हिंदू’

इंद्रेश कुमार ने स्पष्ट किया कि ‘हिंदू’ न तो कोई राजनीतिक संज्ञा है और न ही कोई धार्मिक शब्द है. उन्होंने कहा कि यह एक भौगोलिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विशेषण है. इसे समझाते हुए उन्होंने बेहतरीन उदाहरण दिया कि जैसे अमेरिका के लिए ‘अमेरिकन’, रूस के लिए ‘रूसी’, चीन के लिए ‘चीनी’ और ब्रिटेन के लिए ‘ब्रिटिश’ आइडेंटिटी (पहचान) है, ठीक उसी प्रकार ‘हिंद’ के लिए ‘हिंदवी’ और ‘हिंदू’ आइडेंटिटी है. उन्होंने कहा कि जो लोग इसे किसी के विरोध में या सांप्रदायिकता के रूप में देखते हैं, वे अज्ञानवश ऐसा सोचते हैं और उनका विश्लेषण पूरी तरह गलत है.

लाखों मुसलमानों से किया संवाद

इंद्रेश कुमार ने ‘हिंदू’ शब्द को पूजा की विधि या कर्मकांड से अलग बताते हुए कहा कि चाहे हम खुद को आर्य कहें, भारतीय कहें, इंडियन कहें या हिंदू कहें, बात एक ही है. उन्होंने मंच से एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि पिछले 20-25 सालों में उन्होंने करीब 20-25 लाख मुसलमानों के साथ-साथ ईसाइयों, जैनियों, बौद्धों और सिखों से सीधा संवाद किया है. इस संवाद में यह बात साफ तौर पर निकलकर आई कि “द इंडियन इज द हिंदू” (The Indian is the Hindu) और इसमें कोई टकराव या मतभेद नहीं है.

भारत एक्सप्रेस मेगा कॉन्क्लेव का यह सत्र इस मायने में बेहद अहम रहा कि इसमें ‘हिंदू राष्ट्र’ जैसी संकल्पना को संकीर्ण धार्मिक चश्मे से हटाकर एक व्यापक राष्ट्रीयता के नजरिए से पेश किया गया. ‘भारत एक्सप्रेस मेगा कॉन्क्लेव’ के इस मंच से इंद्रेश कुमार ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि 2047 के ‘नए भारत’ की पहचान आपसी टकराव में नहीं, बल्कि सबको साथ लेकर चलने वाली इसी सर्व-समावेशी संस्कृति में छिपी है.

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