लेफ्टिनेंट जनरल D.P. Pandey ने साझा किया ‘राष्ट्र प्रथम’ का दृष्टिकोण और आत्मनिर्भर भारत का विजन

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Bharat Express 3rd Anniversary: भारत एक्सप्रेस कॉन्क्लेव में लेफ्टिनेंट जनरल डी.पी. पांडे ने अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने बताया कि ‘राष्ट्र प्रथम’ उनके दिल और दिमाग में दशकों से रहा है. जब मोबाइल आया तो सबसे पहले उन्होंने उसमें ‘Nation First’ और ‘राष्ट्र प्रथम’ की डीपी लगाई. उन्होंने कहा कि राष्ट्र की परिभाषा सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक अवधारणा है जिसमें कई भाषाएं, संस्कृतियां और जीवन शैलियां शामिल होती हैं.

राष्ट्र बनाम नेशन की परिभाषा

जनरल पांडे ने स्पष्ट किया कि ‘नेशन’ एक पश्चिमी अवधारणा है, जबकि ‘राष्ट्र’ वेदों और कौटिल्य की परिभाषा के अनुसार कहीं अधिक व्यापक है. राष्ट्र सीमाओं से बंधा नहीं होता, बल्कि विविधता में एकता का प्रतीक होता है. उन्होंने कहा कि अगर किसी सर्वोच्च उद्देश्य के लिए खुद को समर्पित करना है तो वह राष्ट्र होना चाहिए.

जनरल पांडे की शौर्य गाथा

मिहिर रंजन ने दो घटनाओं का उल्लेख किया. पहली घटना में जनरल पांडे ने अपनी शादी का कार्यक्रम रद्द कर दिया क्योंकि उन्हें पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन में जाना था. दूसरी घटना में उनकी माता जी का देहांत हुआ, लेकिन तेरहवीं से पहले ही वे यूनिट में लौट गए क्योंकि ऑपरेशन के लिए उनकी जरूरत थी. यही राष्ट्र प्रथम का असली भाव है.

‘सेना कभी निराश नहीं करेगी’

जनरल पांडे ने कहा कि भारत की सेना कभी निराश नहीं करेगी. 1948, 1965, 1971 और कारगिल युद्ध में साधन कम होने के बावजूद मिशन पूरे किए गए. उन्होंने बताया कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में रक्षा क्षेत्र ने पिछले 10 सालों में बहुत प्रगति की है. पहले गोला-बारूद और उपकरणों की कमी थी, अब नहीं है. टेक्नोलॉजी में भी हमने 10-15 साल का अंतर कम किया है. उन्होंने विश्वास जताया कि 2047 से पहले ही भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो सकता है.

जनरल पांडे का संदेश

उन्होंने कहा कि युद्ध शुरू करना आसान है लेकिन खत्म करना मुश्किल. कारगिल में भी रणनीतिक संयम रखा गया. हर मिशन का उद्देश्य होता है और जब वह पूरा हो जाए तो रुकना जरूरी है. रूस-यूक्रेन और इजराइल-हमास युद्ध के उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि युद्ध लंबा खिंचता है और विनाशकारी होता है. सेना जरूरी है युद्ध करने के लिए नहीं बल्कि युद्ध रोकने के लिए.

‘टेक्नोलॉजी सैनिक की जगह नहीं ले सकती’

जनरल पांडे ने कहा कि आज की लड़ाई दूर से मार करने वाली ड्रोन, मिसाइल, बैलिस्टिक सिस्टम टेक्नोलॉजी की है. बॉर्डर पर सैनिक ही काम आता है. टेक्नोलॉजी सैनिक की जगह नहीं ले सकती. उन्होंने कहा कि 2047 का विकसित भारत तभी बनेगा जब सुरक्षित भारत होगा.

‘रिटायरमेंट के बाद किताबें लिखना जरूरी’

जनरल पांडे ने कहा कि रिटायरमेंट के बाद किताबें लिखना सही है. अगर अनुभव किताबों में नहीं आएगा तो अगली पीढ़ी नहीं सीखेगी. युद्ध और रणनीति के सबक लिखना जरूरी है ताकि देश आगे बढ़ सके.

इस तरह भारत एक्सप्रेस कॉन्क्लेव में लेफ्टिनेंट जनरल डी.पी. पांडे ने राष्ट्र प्रथम की परिभाषा, अपने त्याग, आत्मनिर्भर भारत की दिशा और युवाओं के लिए प्रेरणादायक संदेश साझा किया.

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