Sawan 2026: भगवान शिव को समर्पित सावन के पहले दिन देश के प्रमुख शिव मंदिरों में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर भगवान शिव के प्रति लोगों की अटूट आस्था को दर्शाया. बुधवार सुबह से ही अयोध्या से हरिद्वार और देवघर से लखनऊ तक शिवभक्तों में उत्साह देखने को मिला.
अयोध्या के प्रसिद्ध नागेश्वर नाथ मंदिर, झारखंड के बाबा बैद्यनाथ धाम, लखनऊ के मनकामेश्वर मंदिर और हरिद्वार के प्रमुख शिव मंदिरों में दर्शन और जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें देखने को मिलीं. श्रद्धालुओं का मानना है कि सावन में सच्चे मन से भोलेनाथ की आराधना करने पर भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है.
महाकाल की भस्म आरती
सावन के पहले दिन उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भगवान महाकाल की विशेष भस्म आरती की गई. इस दौरान पुजारी ने बताया कि यह एक प्राचीन परंपरा है. मंदिर के कपाट सुबह 3 बजे खोले गए. इसके बाद बाबा महाकाल की विशेष पूजा-अर्चना की गई और दही, दूध, शहद, चीनी तथा घी से पंचामृत अभिषेक किया गया. फिर उन्हें केसर स्नान कराया गया. भस्म आरती से पहले बाबा महाकाल का विशेष भांग श्रृंगार किया गया…”
अयोध्या में नागेश्वर नाथ मंदिर में उमड़ी भीड़
अयोध्या स्थित प्राचीन नागेश्वर नाथ मंदिर में सावन के पहले दिन तड़के से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया. बड़ी संख्या में भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया और परिवार की सुख-समृद्धि तथा मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की. मंदिर परिसर में “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से विशेष व्यवस्था की गई थी.
हरिद्वार में गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब
सावन शुरू होते ही धर्मनगरी हरिद्वार में भी आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला. इस दौरान हर की पैड़ी समेत विभिन्न घाटों पर लाखों श्रद्धालु गंगाजल लेने पहुंचे. सुबह चार बजे से ही शिव मंदिरों में जल चढ़ाने का सिलसिला शुरू हो गया. कांवड़ियों और शिवभक्तों से गंगा घाट पूरी तरह भरे नजर आए. गंगाजल लेकर बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए.
देवघर और मनकामेश्वर मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भीड़
झारखंड के प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में सावन के पहले दिन विशेष पूजा-अर्चना के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. देश के विभिन्न राज्यों से आए भक्तों ने बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित किया. वहीं, लखनऊ स्थित प्रसिद्ध मनकामेश्वर मंदिर में भी दर्शन और जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें देखी गईं. मंदिरों में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए गए.
सावन में शिव पूजा का विशेष महत्व
हिंदू धर्म में सावन माह को भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस माह भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक और व्रत करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है तथा जीवन की बाधाएं दूर होती हैं. सावन के दौरान शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और भस्म अर्पित करने की परंपरा है. कई श्रद्धालु रुद्राभिषेक और विशेष अनुष्ठान भी कराते हैं.
चार सावन सोमवार का रहेगा विशेष महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में सावन माह 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त को समाप्त होगा. इस बार सावन कुल 31 दिनों का रहेगा. सावन में पड़ने वाले सोमवारों का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. इस वर्ष पहला सावन सोमवार 3 अगस्त, दूसरा 10 अगस्त, तीसरा 17 अगस्त और चौथा 24 अगस्त को पड़ेगा. इन दिनों शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक बढ़ने की संभावना है.

