New Delhi: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के एक शीर्ष अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि भारत आज एक ऐतिहासिक यात्रा की दहलीज पर खड़ा है. ज्ञात और अज्ञात स्रोतों से चुनौतियां और बाधाएं आती रहेंगी. प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास ने पहला विवेक देवराय स्मृति व्याख्यान देते हुए कहा कि सरकार की नीतियों और सुधारों के कारण भारत एक ऐतिहासिक यात्रा की दहलीज पर है और परिस्थितियां उसके पक्ष में हैं.
वैश्वीकरण को गति देने वाली आम सहमति कमजोर
ऐसे समय में जब पिछले दशकों में वैश्वीकरण को गति देने वाली आम सहमति कमजोर पड़ गई है और बहुपक्षीय सहयोग हासिल करना कठिन हो गया है, भारत ने आत्मनिर्भरता की परिकल्पना को अपनी नीतियों के सर्वोपरि सिद्धांत के रूप में अपनाया है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर दास ने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का मतलब अलग-थलग पड़ना नहीं बल्कि यह मूलभूत क्षमता और लचीलापन विकसित करने की एक रणनीति है.
भारत की ग्रोथ को लेकर चिंता
उन्होंने कहा कि आर्थिक आत्मनिर्भरता का अर्थ है घरेलू स्तर पर महत्वपूर्ण वस्तुओं और प्रौद्योगिकियों के उत्पादन की क्षमता विकसित करना और विदेशी स्रोतों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना. इससे पहले पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने भारत की ग्रोथ को लेकर चिंता जाहिर की थी. उन्होंने कहा था कि देश की अर्थव्यवस्था शायद ठीक होने की राह पर नहीं है. बाहरी और अंदरूनी दबावों के कारण विकास धीमा हो सकता है.
वित्तीय वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था 7.4% बढ़ी
ब्लूमबर्ग टेलीविजन को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अमेरिका की तरफ से संभावित टैरिफ चीन के बढ़ते निर्यात और सरकारी खजाने पर दबाव जैसी चिंताओं का जिक्र किया. सरकार के आंकड़ों के अनुसार इस साल मार्च में खत्म हुए वित्तीय वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था 7.4% बढ़ी है. यह लगातार दूसरे साल दुनिया में सबसे तेज विकास दर है. लेकिन सुब्रमण्यन ने इस आंकड़े को सावधानी से देखने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि यह अनुमान पुरानी समस्या यानी मापने की सटीकता से प्रभावित हो सकता है.
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