रूसी तेल खरीदने को लेकर अमेरिका के नरम पड़े तेवर, भारत के बाद अन्य देशों को मिली छूट

Divya Rai
Content Writer The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

US on Russian Oil: ईरान के साथ भीषण संघर्ष के बीच बीते दिन अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने पर छूट देने का ऐलान किया. वहीं, अब उसने भू-राजनीतिक तनाव के बीच समुद्र में फंसे कुछ अन्य देशों को रूस से तेल खरीदने की इजाजत दी है. अमेरिका बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच विश्व ऊर्जा बाजार को स्थिर करना चाहता है. हालांकि, अमेरिका रूस से तेल खरीदने को लेकर लगातार कई दावें करता रहा है, लेकिन भारत ने हमेशा एक ही जवाब दिया है कि हम अपनी शर्तों, अपने हितों और अपने हालात को देखते हुए जो बेहतर होगा वो कदम उठाएंगे और किसी के दबाव में नहीं आएंगे.

रूस के लिए वित्तीय फायदे को कम किया जाएगा

अमेरिका के वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह कदम मौजूदा तेल सप्लाई की पहुंच बढ़ाने के लिए है. इसके साथ ही रूस के लिए वित्तीय फायदे को कम किया जाएगा, क्योंकि इसमें शामिल क्रूड ऑयल पहले से ही ट्रांजिट में है. बेसेंट ने कहा, “पोटस विश्व ऊर्जा बाजार में स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए अहम कदम उठा रहा है और आतंकवादी ईरानी शासन से पैदा हुए खतरे और अस्थिरता से निपटने के लिए कीमतें कम रखने पर काम कर रहा है.”

वित्त विभाग ने अस्थायी प्राधिकरण जारी किया है US on Russian Oil

अमेरिकी वित्त विभाग ने एक अस्थायी प्राधिकरण जारी किया है, जो 12 मार्च से पहले जहाजों पर लोड किए गए रूसी मूल के क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की बिक्री, डिलीवरी या ऑफलोडिंग के लिए जरूरी ट्रांजैक्शन की इजाजत देता है. यह कदम देशों को ऐसा तेल खरीदने की इजाजत देता है जो पहले से ही ट्रांजिट में है और अभी प्रतिबंधों से जुड़ी पाबंदियों की वजह से समुद्र में फंसा हुआ है. बेसेंट ने कहा, “मौजूदा सप्लाई की वैश्विक पहुंच बढ़ाने के लिए, अमेरिकी वित्त विभाग देशों को समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने की इजाजत देने के लिए एक अस्थायी ऑथराइजेशन दे रहा है.”

इससे रूसी सरकार को कोई खास वित्तीय फायदा नहीं होगा

अमेरिकी अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि यह कदम लिमिटेड है और सिर्फ उन कार्गो पर लागू होता है जो पहले से ही जहाजों पर लोड किए जा चुके हैं. बेसेंट ने कहा, “यह खास तौर पर तैयार किया गया शॉर्ट-टर्म उपाय सिर्फ उस तेल पर लागू होता है जो पहले से ट्रांजिट में है और इससे रूसी सरकार को कोई खास वित्तीय फायदा नहीं होगा. रूस को अपना ज्यादात्तर वित्तीय लाभ ऊर्जा रेवेन्यू निकालने की जगह पर लगाए गए टैक्स से मिलता है.” अमेरिकी वित्त सचिव ने कहा कि सरकार का मानना ​​है कि तेल की कीमतों में अस्थायी बढ़ोतरी एक शॉर्ट-टर्म रुकावट को दिखाती है और बड़ी ऊर्जा नीति लंबे समय में सप्लाई को मजबूत करेगी.

मेहनती अमेरिकियों के लिए फ्यूल की कीमतें कम हुई हैं

उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप की ऊर्जा के लिए बनी नीति ने अमेरिका के तेल और गैस प्रोडक्शन को रिकॉर्ड लेवल पर पहुंचाया है, जिससे मेहनती अमेरिकियों के लिए फ्यूल की कीमतें कम हुई हैं. तेल की कीमतों में अस्थायी बढ़ोतरी एक शॉर्ट-टर्म और अस्थायी रुकावट है जिससे लंबे समय में हमारे देश और अर्थव्यवस्था को बहुत फायदा होगा.” यह फैसला इस हफ्ते की शुरुआत में भारत को दी गई इसी तरह की छूट के बाद आया है, जो ग्लोबल एनर्जी सप्लाई और कीमतों की स्थिरता को लेकर चिंताओं के साथ प्रतिबंध के दबाव को संतुलित करने की अमेरिका की कोशिश को दिखाता है.

एनर्जी मार्केट में फिर से उतार-चढ़ाव आया है

मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव (US on Russian Oil) और तेल सप्लाई के रास्तों और इंफ्रास्ट्रक्चर में रुकावटों की चिंताओं के बीच एनर्जी मार्केट में फिर से उतार-चढ़ाव आया है. सरकारें रूस और ईरान पर बैन का दबाव जारी रखते हुए सप्लाई बनाए रखने के तरीके ढूंढ रही हैं. रूस कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के दुनिया के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक बना हुआ है. 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद से, अमेरिका और उसके साथियों ने रूसी वित्तीय संस्थाओं, शिपिंग नेटवर्क्स और ऊर्जा निर्यात को लक्षित करते हुए बड़े प्रतिबंध लगाए हैं.

ये भी पढ़ें- ईरान में ‘राष्ट्रीय एकता और एकजुटता सप्ताह’ घोषित, उपराष्ट्रपति मोहम्मद-रेजा आरिफ ने किया ऐलान

Latest News

इराक में ड्रोन हमले में फ्रांसीसी सैनिक की मौत, मैक्रों ने दी चेतावनी, बोले-हम इसका जवाब देने को तैयार

US Israel Iran War: पश्चिम एशिया में धधक रहा युद्ध अब खतरनाक रूप से फैलता नजर आ रहा है....

More Articles Like This

Exit mobile version