Trump Tariff Bill: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट’ पर हस्ताक्षर कर इसे कानून में बदल दिया. अमेरिकी प्रतिनिधि सभा द्वारा विधेयक को मंजूरी दिए जाने के दो दिन बाद ट्रंप ने इसे अपनी स्वीकृति दी.
इस सूची में भारत का नाम भी शामिल है Trump Tariff Bill
कानून लागू होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति के पास रूस से तेल और गैस खरीदने वाले पांच प्रमुख देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार होगा. रूस से ऊर्जा आयात करने वाले देशों की इस सूची में भारत का नाम भी शामिल है. ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद रूस पर नए प्रतिबंध लगाने की करीब डेढ़ साल से जारी प्रक्रिया अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई. इसकी शुरुआत अप्रैल 2025 में हुई थी, जब अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम और रिचर्ड ब्लूमेंथल ने इस प्रस्ताव का शुरुआती मसौदा सीनेट में पेश किया था.
किसी एक देश को सीधे तौर पर निशाने पर नहीं रखा गया है
इस कानून के पीछे प्रमुख उद्देश्य रूस की ऊर्जा बिक्री से होने वाली कमाई पर असर डालना और मॉस्को पर कूटनीतिक दबाव बढ़ाना था. इसके जरिए यूक्रेन में चार साल से अधिक समय से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए रूस को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश की जानी थी. हालांकि, नए कानून में किसी एक देश को सीधे तौर पर निशाने पर नहीं रखा गया है. इसके तहत अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को विदेश और ऊर्जा विभाग के प्रमुखों से परामर्श के बाद उन पांच देशों की पहचान करनी होगी, जो पिछले 12 महीनों के दौरान मात्रा के हिसाब से रूस से सबसे अधिक कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदते रहे हैं.
जरूरत के मुताबिक इसमें बदलाव किया जा सकता है
इन देशों की सूची को हर 180 दिन में दोबारा जांचा जाएगा और जरूरत के मुताबिक इसमें बदलाव किया जा सकता है. संबंधित देशों पर लगाए जाने वाले टैरिफ की दर राष्ट्रपति तय करेंगे, जिसकी अधिकतम सीमा 100 प्रतिशत होगी. हालांकि, कानून राष्ट्रपति को रूस से ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर टैरिफ लगाना अनिवार्य नहीं करता. इस कानून के समर्थकों में शामिल अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने भारत और चीन से रूस से ऊर्जा आयात कम करने की अपील की है. अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में विधेयक के पारित होने के बाद बुधवार को ब्लूमेंथल ने दोनों देशों से रूस के बजाय अन्य स्रोतों से तेल और गैस खरीदने का आग्रह किया.
सहयोगी देशों के लिए कुछ राहत का प्रावधान भी रखा गया है
कानून में अमेरिका के यूरोपीय सहयोगी देशों के लिए कुछ राहत का प्रावधान भी रखा गया है. इसके तहत ऐसे देशों को प्रतिबंधों से छूट मिल सकती है, जिनकी रूस से प्राकृतिक गैस की खरीद रूस के कुल गैस निर्यात के 15 प्रतिशत से कम है और जो इन आयातों को घटाने की दिशा में ठोस कदम उठा रहे हैं. वहीं, कानून में रूस से सीधे अमेरिका पहुंचने वाले सामान पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान भी शामिल किया गया है.
टैरिफ में छूट देने का अधिकार भी हासिल होगा
नए कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को किसी देश पर लगाए गए टैरिफ में छूट देने का अधिकार भी हासिल होगा. हालांकि, ऐसा करने के लिए उन्हें कांग्रेस के सामने यह प्रमाणित करना होगा कि संबंधित छूट अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है. वहीं, किसी देश को टैरिफ से स्थायी राहत तभी मिल सकेगी, जब राष्ट्रपति यह पुष्टि करें कि उस देश ने रूस से ऊर्जा की खरीद पूरी तरह बंद कर दी है. साथ ही, उसे भविष्य में भी रूस से तेल या गैस की खरीद दोबारा शुरू नहीं करने का विश्वसनीय आश्वासन देना होगा.