Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, स्कन्द महापुराण में भगवान शंकर से भगवती पार्वती ने पूछा- सबसे अधिक आराधना योग्य कौन है? भगवान शंकर कहते हैं इस संसार में सबसे अधिक पूजनीय भगवान नारायण है।...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, ' प्रभाते करदर्शनम् ' के पीछे अपनी संस्कृति में कितनी भव्य भावना समाई है। भारतीय संस्कृति कहती है : हे मानव ! नित्य सवेरे ब्रह्ममुहूर्त में उठकर ध्यान चाहे...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, प्रभु को प्रसन्न रखने का लक्ष्य लेकर ही प्रत्येक काम करो। माँ अपने बालक को जब घर से बाहर लेकर निकलती हैं तो अपने अन्तर की प्रसन्नता को व्यक्त...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, प्रभु से मिलने की तीव्र आतुरता जिसके अन्तर में पैदा होती है, वही महान भक्त है। भक्ति भाव की पराकाष्ठा में नाम और रूप सम्पूर्ण रूप से विस्मृति हो...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, मनुष्य का जीवन तो साँप के मुँह में पड़े हुए मेंढक जैसा है। उसका जीवन मौत के मुँह में है, फिर भी वासना की मक्खियों को पकड़ने के लिए...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, कई लोगों को भक्तों में दोष दिखाई देते हैं। इतना ही नहीं, कुछ लोग तो भगवान में भी बुराइयाँ ढूँढने की नजर रखते हैं।मनुष्य के मन में यदि एक...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, प्रभु-प्रेम के बिना ज्ञान शोभा नहीं देता।ब्रह्मज्ञानी को ब्रह्मप्रेमी बनना पड़ता है।जहाँ कथा-कीर्तन आदि होते हैं, वहाँ प्रभु गुप्त रूप से आते हैं, क्योंकि प्रभु को तो पर्दे के...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, अपने मन से भी सावधान रहें?मनुष्य अपने शरीर से उतने पाप नहीं करता है, जितने अपने मन से करता है। तन से किए गए पापों के पकड़े जाने का...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, मन यदि भटकता हो तो उसे फटकारते रहो। वैसे मन है भी बहुत डरपोक। एक बार डरा दोगे तो फिर कभी पाप नहीं करेगा। मन को समझाओ कि तू...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, किसी महामंत्र का जाप करते समय यदि घर में किसी की मृत्यु होती है या कोई बड़ा नुक्सान हो जाता है तो भी हृदय में महामंत्र के प्रति दुर्भाव...