RBI के नए ECL फ्रेमवर्क के तहत बैंक भविष्य के जोखिम का पहले से आकलन करेंगे. ऐसे में कम CIBIL स्कोर वाले लोगों को लोन मंजूरी, ब्याज दर और शर्तों को लेकर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
भारत की क्रेडिट इंडस्ट्री का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट दिसंबर 2025 तक 17% बढ़कर 130 लाख करोड़ रुपये हो गया. सिक्योर्ड लोन, खासकर गोल्ड और होम लोन की मांग में तेज उछाल दर्ज की गई.