New Delhi: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच दोबारा शुरू होने वाली शांति वार्ता एक बार विफल हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चेतावनी भरे संदेश आने के बाद ईरान का प्रतिनिधिमंडल वापस लौट गया है. ईरान के शीर्ष राजनयिक के पाकिस्तान से प्रस्थान करने और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूतों के इस्लामाबाद नहीं पहुंचने के बाद वार्ता के प्रयास विफल हो गए.
अब ईरान के पाले में है गेंद
अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि अब गेंद ईरान के पाले में है. उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, “यदि वे बात करना चाहते हैं, तो उन्हें बस कॉल करने की जरूरत है!!!” ये वार्ता इस महीने की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक वार्ता के बाद होने वाली थीं, जिसमें अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और ईरान का नेतृत्व संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालीबाफ कर रहे थे.
ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी शुरू
हांलांकि ईरानी अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी सेनाओं ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी शुरू कर दी है, ऐसे में अमेरिका पर कैसे विश्वास किया जा सकता है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शनिवार शाम पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से प्रस्थान कर गए. पाकिस्तान के दो अधिकारियों ने एसोसिएटेड प्रेस (एपी) को यह जानकारी दी.
रूस के लिए रवाना होंगे अराघची
अराघची होर्मुज जलडमरूमध्य के दूसरी ओर स्थित देश ओमान गए हैं, जो पूर्व में शांति वार्ता में मध्यस्थ रह चुका है. अराघची ने कहा कि वह रविवार को पाकिस्तान लौटेंगे और फिर रूस के लिए रवाना होंगे. दूसरी ओर ट्रंप ने अपने दूतों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को पाकिस्तान जाने से रोक दिया, जिसकी वजह से वे इस्लामाबाद नहीं पहुंच सके.
क्या US वास्तव में गंभीर
अराघची ने पाकिस्तान में हुई बातचीत के बारे में सोशल मीडिया पर कहा, “हमने ईरान के खिलाफ जारी युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए एक व्यावहारिक ढांचे पर अपना रुख साझा किया. अब यह देखना है कि क्या अमेरिका वास्तव में कूटनीति को लेकर गंभीर है.”
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