Bangladesh elections: बांग्लादेश में हसीना सरकार के पतन के बाद से ही हिंदुओं के खिलाफ हिंसा जारी है. देश में प्रदर्शन के दौरान भारतीय दूतावास को भी निशाना बनाया गया है. वहीं, अब 12 फरवरी को बांग्लादेश में आम चुनाव होने है, लेकिन इसे पहले वहां रह रहे भारतीयों पर हमले की आशंका है. ऐसे में भारत सरकार द्वारा बड़ा कदम उठाया गया है.
दरअसल, बांग्लादेश में भारतीयों के रहने वाले स्थानों पर हिंसा के खतरे के बीच भारत सरकार ने देश में भारतीय डिप्लोमैट और अधिकारियों के परिवारों को भारत लौटने की सलाह दी है. भारत ने अपने डिप्लोमैट्स के लिए बांग्लादेश को नॉन-फैमिली पोस्टिंग बनाने का फैसला किया और बांग्लादेश में मिशन और पोस्ट अधिकारियों के डिपेंडेंट्स को घर लौटने की सलाह दी.
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर बढ़ रही चिंता
वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है, क्योंकि पड़ोसी देश में सांप्रदायिक घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि एहतियात के तौर पर, हमने हाई कमीशन और चार असिस्टेंट हाई कमीशन के अधिकारियों के डिपेंडेंट्स को भारत लौटने की सलाह दी है.” पिछले महीने चटगांव में विरोध के मद्देनजर भारत सरकार ने यह फैसला लिया है.
बांग्लादेश में मारे गए हिंदू कम्युनिटी के सात लोग
दरअसल, एक्सट्रीमिस्ट और रेडिकल एलिमेंट्स की धमकियों ने डिप्लोमैट्स और उनके परिवारों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. बांग्लादेश हिंदू बुद्धिस्ट क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल के मुताबिक, दिसंबर से बांग्लादेश में हिंदू कम्युनिटी के लगभग सात लोग मारे गए हैं, लेकिन इस स्थिति के बावजूद, बांग्लादेश में सभी पांच डिप्लोमैटिक मिशन पूरी स्ट्रेंथ के साथ काम करते रहेंगे. खास तौर पर, हाई कमीशन और चार दूसरी पोस्ट पूरी स्ट्रेंथ के साथ काम करते रहेंगे. चटगांव, खुलना, राजशाही और सिलहट पोस्ट खुले रहेंगे.
राजनयिकों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
हालांकि, डिप्लोमैट्स के परिवार को वापस लौटने के उम्मीदों को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है. इसके अलावा, सुरक्षा चिंताओं के कारण, बांग्लादेश में डिप्लोमैट्स की संख्या के बारे में जानकारी नहीं मिल सकी. सोमवार को, अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार ने सोशल मीडिया पर पिछले साल के पुलिस रिकॉर्ड की एक ऑफिशियल रिव्यू रिपोर्ट शेयर की.
रिपोर्ट में अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों से जुड़ी 645 घटनाओं का डॉक्यूमेंटेशन किया गया था. साथ ही ये कहा भी गया था कि 71 घटनाओं की पहचान सांप्रदायिक तत्वों के रूप में की गई, जबकि 574 घटनाओं को गैर-सांप्रदायिक प्रकृति का माना गया.
नॉन-फैमिली पोस्टिंग क्या है?
भारत ने अपने डिप्लोमैटिक पोस्ट को ‘नॉन-फैमिली’ के रूप में क्लासिफाई किया है जो सबसे कड़े सुरक्षा उपायों में से एक है. भले ही पाकिस्तान के साथ भारत के रिश्ते अब तक के सबसे निचले स्तर पर हैं, लेकिन बांग्लादेश में भारतीय डिप्लोमैट्स के लिए उपाय ज्यादा कड़े हैं. बता दें कि पाकिस्तान में, भारतीय डिप्लोमैट्स नो चिल्ड्रन पोस्टिंग का पालन करते हैं, जिसका मतलब है कि पति-पत्नी अधिकारियों के साथ शामिल हो सकते हैं. वहीं, इस मामले से संबंधित सूत्रों के मुताबिक, मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार से पाकिस्तानी लोगों को मिली आजादी को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं.
अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देने में नाकाम
इस दौरान भारत का आरोप है कि अंतरिम सरकार बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों की रक्षा करने में नाकाम रही और ढाका में सरकार पर कट्टरपंथी ग्रुप्स की गतिविधियों पर आंखें मूंद लेने का आरोप लगाया. अगस्त 2024 में केयरटेकर सरकार के सत्ता में आने के बाद से, भारत-बांग्लादेश के रिश्ते काफी खराब हो गए हैं. दोनों पक्षों ने अपने मिशन पर सुरक्षा बढ़ा दी है. 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव है. इस चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) प्रमुख दावेदार मानी जा रही है. भारत को उम्मीद है कि बीएनपी की सरकार बनने के बाद संबंध सुधरेंगे.