दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज Binance की तिजोरी से 60 हजार करोड़ रुपये गायब, जांच में जुटी FBI और अमेरिकी सीक्रेट सर्विस

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Binance Crypto Hack: जिस प्लेटफॉर्म पर लोग अपनी डिजिटल कमाई सुरक्षित समझकर रखते थे, उसी के डिजिटल वॉलेट में हैकर्स ने सेंध लगा दी, इस हमले में दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज बाइनेंस (Binance) में करीब 6 अरब डॉलर (60 हजार करोड़ रुपये) की क्रिप्टोकरेंसी चोरी होने का दावा किया है. जिसे अब तक की सबसे बड़ी क्रिप्टो चोरी माना जा रहा है. वहीं, घटना के बाद बाइनेंस ने पैसे जमा करने और निकालने की सुविधा अस्थायी रूप से बंद कर दी. कंपनी का कहना है कि यूजर्स का पैसा सुरक्षित है और चोरी हुई रकम की भरपाई वह अपने फंड से करेगी.

रिपोर्ट के अनुसार, इस हैकिंग के पीछे उत्तर कोरिया के हैकर्स का नाम सामने आ रहा है. फिलहाल, अमेरिका की FBI भी इसकी जांच में कूद गई है. दरअसल, बाइनेंस ने गुरुवार देर रात शुरुआती जांच के आधार पर बताया कि हैकिंग की शुरुआत कंपनी के एक इंजीनियर के लैपटॉप से हुई थी. इसके जरिए हमलावर एक सर्विस कंटेनर तक पहुंचने में कामयाब रहे और फिर बिना अनुमति के पैसे निकालने से जुड़े ट्रांजैक्शन किए.

हैकर्स ने कैसे लगाई सेंध?

 कंपनी के मुताबिक, इस हैकिंग की जांच अभी जारी है. फिलहाल किसी एक व्यक्ति को हमले के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है. इस दौरान ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे पता चले कि किसी डिजिटल वॉलेट की पर्सनल चाबी लीक हुई थी. बाइनेंस के सह-CEO रिचर्ड टेंग ने X पर कहा कि यह कोई साधारण या एक क्लिक में किया गया हमला नहीं था, बल्कि इसके पीछे कई चरणों वाली जटिल प्रक्रिया थी.

3 अरब डॉलर की रकम फ्रीज

बता दें कि चोरी हुई रकम को बचाने के लिए कई क्रिप्टो कंपनियां एक साथ काम कर रही हैं. इस कोशिश में करीब 3 अरब डॉलर की चोरी हुई क्रिप्टोकरेंसी को फ्रीज कराया जा चुका है. फिलहाल ब्लॉकचेन लेनदेन पर नजर रखने वाली कंपनियां बाकी रकम का पता लगाने में जुटी हैं. वहीं, बाइनेंस ने भी पुलिस और ऐसी कंपनियों के साथ मिलकर काम करने की बात कही है, ताकि चोरी हुई रकम को ट्रेस कर वापस लाया जा सके.
कंपनी का कहना है कि वह सभी नुकसान की भरपाई अपने फंड और इमरजेंसी एसेट्स फंड से करेगी. बाइनेंस ने साफ कहा कि ‘यूजर्स का पैसा सुरक्षित है.’ सुरक्षा जांच पूरी करने और चोरी हुई रकम का पता लगाने के लिए कंपनी ने जमा और निकासी की सुविधा अस्थायी रूप से रोक दी है. ऐसे में कंपनी को उम्मीद है कि रविवार सुबह तक निकासी की सुविधा फिर शुरू हो जाएगी.

उत्तर कोरिया के हैकर्स पर शक

रिपोर्ट के मुताबिक कई क्रिप्टो जांच कंपनियों ने इस हमले के पीछे उत्तर कोरिया के हैकिंग समूहों का हाथ होने की आशंका जताई है. उसके पास मौजूद ऑनलाइन और ऑफलाइन सबूत इस हमले को उत्तर कोरिया की एक खास हैकिंग टीम से जोड़ते हैं. कंपनी का कहना है कि हमले का तरीका उत्तर कोरिया से जुड़े पहले के कई साइबर हमलों से मिलता-जुलता है.
सिंगापुर की कंपनी पेंगोलिन इंटेलिजेंस ने भी इसी दिशा में शक जताया है. उसके एक विश्लेषक का कहना है कि ब्लॉकचेन पर हुए लेनदेन और पहले की घटनाओं से मिली जानकारी की तुलना के बाद यह आशंका मजबूत हुई है. विश्लेषक के मुताबिक, चोरी की रकम को नकदी में बदलने के लिए उत्तर कोरिया से जुड़े हैकर्स मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की मदद ले सकते हैं. उन्होंने कहा कि हैकर्स और जांच एजेंसियों के बीच असली मुकाबला अभी शुरू हुआ है.

FBI और अमेरिकी सीक्रेट सर्विस भी जांच में जुटीं

अमेरिकी जांच एजेंसियों ने भी मामले पर नजर रखनी शुरू कर दी है. FBI ने शुक्रवार को कहा कि उसे घटना की जानकारी है. वह सरकारी और प्राइवेट क्षेत्र से जुड़े संगठनों के साथ मिलकर पता लगा रही है कि हमला कितना बड़ा था और नुकसान कितना हुआ है. अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने बताया कि उसके जांचकर्ता निजी कंपनियों के साथ मिलकर चोरी हुई रकम की पहचान, उसे फ्रीज करने और वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं. इस काम में अमेरिकी डॉलर से जुड़ी डिजिटल करेंसी USDC बनाने वाली कंपनी Circle भी शामिल है.
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