Sofia: बुल्गारिया के अलग-अलग जिलों में इन्फ्लूएंजा वायरस ने कहर मचा दिया है. हर हफ्ते मरीजों की संख्या बढ़ रही है. बुल्गारिया के मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक एंजेल कुनचेव ने फ्लू को महामारी करार कर दिया है. 5 से लेकर 11 जनवरी के बीच संक्रमण प्रति 10,000 व्यक्तियों के 207 मामले दर्ज किए गए थे. संक्रमण के मामले जिले-दर-जिले तेजी से फैल रहे हैं और फ्लू के संक्रमण को रोकने के लिए सरकार हर संभव उपाय कर रही है.
अलग-अलग जिलों में तेजी से फैल रही है बीमारी
बता दें कि इन्फ्लूएंजा वायरस एक मौसमी वायरस है, जो मौसम में बदलाव के साथ तेजी से फैलता है. दुनिया के हर हिस्से में मौसम के बदलाव के साथ इन्फ्लूएंजा के केस बढ़ते हैं लेकिन बुल्गारिया के अलग-अलग जिलों में बीमारी तेजी से फैल रही है. ये खांसने और छींकने से तेजी से फैलती है. हालांकि संक्रमण से निपटने के लिए वर्ना जिले के बाद अब डोब्रिच जिले में भी कुछ उपाय अपनाए जा रहे हैं जिससे फ्लू के संक्रमण को फैलने से रोका जा सके.
सभी स्कूलों में डायरेक्ट क्लास निलंबित
उत्तरपूर्वी बुल्गारिया क्षेत्र में संक्रमण से बचने के लिए 19 जनवरी से लागू होंगे और 23 जनवरी तक प्रभावी रहेंगे. इन उपायों में सभी स्कूलों में डायरेक्ट क्लास निलंबित रहेंगी. साथ ही अस्पताल जाना, नियोजित सर्जरी, बच्चों का टीकाकरण और बाल रोग संबंधी परामर्श पर भी रोक लगा दी गई है. ऐसा कदम इन्फ्लूएंजा वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए किया गया है.
देश फ्लू महामारी के कगार पर
बुल्गारिया के मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक एंजेल कुनचेव ने बीते बुधवार को पत्रकारों को बताया कि देश फ्लू महामारी के कगार पर है. सिलिस्ट्रा, बर्गास, याम्बोल, हास्कोवो और पेर्निक जैसे क्षेत्रों में भी संक्रमण दर बढ़ रही है. हालांकि सकारात्मक संकेत यह है कि महामारी की लहर जितनी तेजी से बढ़ रही है उतनी ही तेज़ी से कम भी हो रही है. मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक के मुताबिक फरवरी के अंत तक फ्लू की स्थिति पर नियंत्रण पा लिया जाएगा.
दवा और आराम करने से बीमारी पर काबू
इससे बचने का विकल्प सिर्फ टीकाकरण और क्वारंटाइन है. इन्फ्लूएंजा के लक्षणों में अचानक बुखार आना, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द और थकान शामिल हैं. सामान्य मामलों में दवा और आराम करने से बीमारी पर काबू पाया जा सकता है. ऐसे में डॉक्टर ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ पीने के लिए कहते हैं और सामान्य लोगों से दूर करने की सलाह भी दी जाती है. इससे बीमारी के फैलने का जोखिम कम हो जाता है.
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