New Delhi: चीन ने ऐसे हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) विकसित किए हैं, जो हजारों किलोमीटर दूर मौजूद महत्वपूर्ण विमानों पर हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें दाग सकते हैं. इनमें हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर, हवाई निगरानी और कमांड विमान तथा उड़ते हुए कमांड सेंटर शामिल हैं. HGV ऐसा हथियार है, जिसे मिसाइल की मदद से ऊंचाई तक पहुंचाने के बाद वह बेहद तेज गति से वातावरण में आगे बढ़ता है. इसकी खासियत यह है कि यह उड़ान के दौरान दिशा बदल सकता है. इससे इसे रोकना मुश्किल हो सकता है और इसकी प्रभावी मारक क्षमता भी बढ़ सकती है.
सैन्य अभियानों को सहायता
इसकी वजह से भविष्य में चीन और अमेरिका के बीच सैन्य संघर्ष की स्थिति बनेगी, तो अमेरिकी हवाई अभियानों के लिए बड़ी चुनौती पैदा हो सकती है. इन हथियारों का इस्तेमाल सीधे लड़ाकू विमानों के बजाय उन विमानों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है, जो दूर रहकर सैन्य अभियानों को सहायता देते हैं. चीन की DF-17 मिसाइल से छोड़ा गया हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन करीब 2414 किलोमीटर तक जा सकता है.
अमेरिका का बड़ा सैन्य अड्डा
यह दूरी चीन से अमेरिकी क्षेत्र गुआम तक लगभग पहुंचती है, जहां अमेरिका का बड़ा सैन्य अड्डा है. वहीं DF-27 मिसाइल की रेंज करीब 5000 मील बताई गई है, जो हवाई तक पहुंचने के लिए काफी है. रिपोर्ट में इसे लंबी किल चेन बताया गया है. इसमें दूर के सेंसर से जानकारी मिसाइल तक पहुंचाने का पूरा सिलसिला शामिल है. दुश्मन इस सिलसिले को बीच में तोड़ने की कोशिश कर सकता है, लेकिन ये आसान नहीं होगा.
पूरी सैन्य कार्रवाई को सपोर्ट
अमेरिकी वायुसेना का E-4B Nightwatch भी ऐसे संभावित लक्ष्यों में शामिल बताया गया है. ये एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) और उड़ते कमांड पोस्ट जैसे विमानों को खतरे में डाल सकता है. ये विमान आमतौर पर सीधे युद्ध से दूर रहकर पूरी सैन्य कार्रवाई को सपोर्ट करते हैं. अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुमान के मुताबिक 2024 तक चीन के पास कम से कम 3150 बैलिस्टिक मिसाइलें और करीब 300 जमीन से लॉन्च होने वाली क्रूज मिसाइलें थीं.
चीन के बैलिस्टिक मिसाइल भंडार में बढ़ोतरी
2015 की तुलना में चीन के बैलिस्टिक मिसाइल भंडार में करीब 147 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी. चीन के साथ-साथ अमेरिका भी लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों पर तेजी से काम कर रहा है. इससे साफ है कि भविष्य के संभावित हवाई युद्ध में लंबी दूरी के हथियार और दुश्मन के महत्वपूर्ण सपोर्ट विमानों को निशाना बनाने की क्षमता बेहद अहम भूमिका निभा सकती है.
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