ईस्ट एशिया में जंग की आहट, ताइवान के मुद्दे पर पीछे हटते दिखे ट्रंप

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

China Taiwan War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने एक बार फिर से पूरी दुनिया के कूटनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है. तीन दिनों की हाई-प्रोफाइल चीन यात्रा खत्म करने के बाद जब ट्रंप एयर फोर्स वन विमान में पत्रकारों से मुखातिब हुए तो उनके सुर पूरी तरह बदले हुए थे. दरअसल, ताइवान की सुरक्षा की कसमें खाने वाले ट्रंप अब ताइवान के मुद्दे पर ‘धृतराष्ट्र’ की तरह आंखें मूंदते नजर आ रहे हैं.

ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि वो फिलहाल ताइवान की आजादी का समर्थन करने या उसे हथियारों की सप्लाई तेज करने के मूड में नहीं हैं. उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका को अपने घर से ‘9,500 मील दूर’ एक और युद्ध की जरूरत नहीं है.

ताइवान को नही मिलेंगे अमेरिकी हथियार

दरअसल, जिनपिंग के साथ हुई लंबी बातचीत के बाद ट्रंप का ये बयान चीन के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है, जबकि ताइवान के लिए ये किसी भूकंप के झटके से कम नहीं है. बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने पहले ताइवान को हथियारों की बिक्री को मंजूरी दी थी लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति खुद इस पर ब्रेक लगाते दिख रहे हैं.

जिनपिंग ने ट्रंप को दी चेतावनी

पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘मैंने अभी हथियारों की बिक्री पर कोई फैसला नहीं किया है लेकिन मैं इस पर अभी थोड़ा सोचूंगा’. चीन शुरू से ही इस सौदे का कड़ा विरोध कर रहा है. जिनपिंग ने ट्रंप को दो-टूक चेतावनी दी थी कि ताइवान के मुद्दे पर कोई भी गलत कदम चीन-अमेरिका संबंधों को हमेशा के लिए बिगाड़ सकता है.

जिनपिंग की ‘रेड लाइन’ और ट्रंप की खामोशी

बैठक के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान को लेकर अपना कड़ा रुख दोहराया. उन्होंने साफ कहा कि चीन ताइवान की स्वतंत्रता का कट्टर विरोधी है और इसे मेनलैंड चाइना के साथ जोड़ने के लिए वो  ताकत का इस्तेमाल करने से भी पीछे नहीं हटेगा.

जब जिनपिंग ताइवान पर अपनी ‘रेड लाइन’ खींच रहे थे तब ट्रंप ने इस पर कोई विरोध नहीं किया. ट्रंप ने खुद स्वीकार किया, ‘मैंने उनकी (जिनपिंग) बात सुनी, लेकिन मैंने कोई टिप्पणी नहीं की’. ट्रंप का ये मौन बहुत कुछ बयां कर रहा है. जानकारों का मानना है कि ट्रंप इस वक्त चीन के साथ ट्रेड और ईरान जैसे मुद्दों पर सहयोग चाहते हैं, इसलिए वो ताइवान को लेकर जिनपिंग को नाराज नहीं करना चाहते.

ट्रंप के ताजा बयान से ये लगने लगा है कि अमेरिका ताइवान की सुरक्षा की अपनी ‘गारंटी’ से पीछे हट सकता है, खासकर तब जब ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि ताइवान को अपनी सुरक्षा के लिए खुद पैसे खर्च करने चाहिए. ऐसे मे ताइवान के अधिकारियों ने ट्रंप के इस रुख पर सधे हुए अंदाज में प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि समिट के नतीजों में ‘कुछ भी हैरान करने वाला नहीं है’. हालांकि, उन्होंने चीन से अपील की है कि वो आइलैंड के चारों ओर सैन्य दबाव बनाना बंद करे, जिसे ताइपे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा मानता है.

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