ChinaTaiwan Confict: चीन और ताइवान के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण बने हुए है, जो अब और भी गंभीर होते हुए दिखाई दे रहें है. ऐसे में ही ताइवान ने गुरुवार सुबह अपने सालाना ‘हान कुआंग’ सैन्य अभ्यास के दौरान युद्ध जैसी स्थिति की तैयारी की. अर्थात यदि जंग शुरू होती है, तो सरकार और सेना क्या करेगी, इसकी ट्रेनिंग दी गई. इस बीच राष्ट्रपति लाई चिंग-ते को एक सुरक्षित सैन्य गाड़ी में बैठाकर गुप्त कमांड सेंटर ले जाया गया. जहां उन्होंने बड़े अधिकारियों के साथ मिलकर तैयारियों का जायजा लिया.
राष्ट्रपति लाई चिंग ते ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें शेयर करके इसकी जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि वह कमांड सेंटर पहुंचे और हान कुआंग अभ्यास को करीब से देखा. दोनो सेनाओं की तैयारियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ताइवान शांति बनाए रखना चाहता है.
आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार
इससे पहले राष्ट्रपति कार्यालय ने कुछ तस्वीरें जारी की थीं. जिनमें लाई बुलेटप्रूफ जैकेट और सैन्य हेलमेट पहने हुए दिखाई दिए. यह अभ्यास ऐसी स्थिति को ध्यान में रखकर किया गया, जिसमें युद्ध शुरू होने पर देश के बड़े नेताओं को सुरक्षित जगह पहुंचाया जाता है, जिससे सरकार और सेना का काम बिना रुके चलता रहे. हालांकि राष्ट्रपति कार्यालय की प्रवक्ता ने कहा कि इस अभ्यास का मकसद यह देखना है कि सरकार के अलग-अलग विभाग आपस में कितनी अच्छी तरह मिलकर काम कर सकते हैं और किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए कितने तैयार हैं.
ताइवान को किस बात का है डर
ताइवान को लंबे समय से डर है कि अगर कभी युद्ध हुआ, तो चीन सबसे पहले देश के बड़े राजनीतिक और सैन्य नेताओं को निशाना बना सकता है. यही वजह है कि इस साल के अभ्यास में नेताओं को सुरक्षित जगह पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर दूसरी कमांड व्यवस्था तैयार रखने पर खास ध्यान दिया गया.
10 दिन तक चलने वाले इस साल के हान कुआंग अभ्यास में 20 हजार से अधिक रिजर्व सैनिक हिस्सा ले रहे हैं. जिसमें युद्ध के समय संचार व्यवस्था बनाए रखने, सरकारी कामकाज चलाने, हथियारों को सुरक्षित जगह पहुंचाने, साइबर हमलों और चीन के संभावित हमले जैसी स्थितियों से निपटने की ट्रेनिंग भी दी जा रही है.
दरअसल, चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और कई बार यह बात कह चुका है कि जरूरत पड़ने पर वह ताकत का इस्तेमाल करके ताइवान को अपने कब्जे में ले सकता है. दूसरी तरफ, ताइवान की सरकार इन दावों को खारिज करती है. उसका कहना है कि ताइवान का भविष्य वहां के लोग ही तय करेंगे.