CJP Delhi protest: राजनीति हो या जनांदोलन, जब तक कोई मुद्दा घर की चारदीवारी, चौराहों तक सीमित रहता है, तब तक उस पर बहस का माहौल अलग होता है. लेकिन जैसे ही वो मुद्दा चारदीवारी से बाहर फैलता है पूरे खेल का रंग-रूप, दांव-पेंच और नैरेटिव पलक झपकते ही बदल जाता है. ऐसे में हाल ही में भारत में चल रहा CJP का विरोध प्रदर्शन अचानक एक नए सियासी मोड़ पर आकर खड़ा हो गया.
दरअसल, आज एयरपोर्ट से अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने डीटेन कर लिया है और बिना इजाजत वाला प्रोटेस्ट वहीं थम गया. ऐसे में भारत में शांति बांग्लादेश से देखी नहीं गई और वहां से उमर खालिद-शरजील इमाम के चाहने वालों ने पैगाम भेज दिया है.
बांग्लादेश से आया ‘सॉलिडैरिटी स्टेटमेंट’ पढ़कर छूट जाएगी हंसी
बांग्लादेश की नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) के संयोजक, 13वीं जातीय संसद के चीफ व्हिप और छात्र आंदोलन का बड़ा चेहरा नाहिद इस्लाम ने 10 अक्टूबर 2026 को भारतीय युवाओं और लोकतांत्रिक ताकतों के समर्थन में एक लंबा-चौड़ा ‘सॉलिडैरिटी स्टेटमेंट’ जारी किया. बता दें कि नाहिद इस्लाम वही छात्र नेता है जिसने जुलाई 2024 में बांग्लादेश में शेख हसीना की 15 साल पुरानी सरकार के खिलाफ हुए ऐतिहासिक छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया था, जिसके बाद हसीना सरकार का तख्तापलट हुआ था.
जिस देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर रोजाना सवाल उठते हों और जहां तख्तापलट के बाद से राजनीतिक अस्थिरता का माहौल हो, वहां का नेता भारत को ‘सद्भाव’ और ‘फासीवाद’ पर भाषण दे रहा है. ये व्यंग्य भी खुद पर हंसाने जैसा है. अपने देश की प्रधानमंत्री को जलील कर बांग्लादेश की इमेज पूरी दुनिया के सामने गिराने वाले नाहिद अब भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के ज्ञान देने चला है.
लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग
उसका कहना है कि ‘हम भारत के उन युवाओं के साथ पूरी एकजुटता के साथ खड़े हैं, जो चुनावी जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं’. हद तो तब हो गई जब उन्होंने वर्षो से जेल में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम का जिक्र करते हुए उन्हें ‘जमीर का कैदी’ और पूरे दक्षिण एशिया के युवाओं का ‘प्रेरणास्रोत’ करार दे दिया. इसके साथ ही शाहीन बाग, जेएनयू और जादवपुर यूनिवर्सिटी के पुराने दौरों का राग अलापते हुए इसे लोकतंत्र की विरासत बता डाला.
भारत कोई बांग्लादेश नहीं है, कान खोलकर सुन लो नाहिद इस्लाम
नाहिद इस्लाम को शायद उनके किसी सलाहकार ने ये बेसिक पाठ नहीं पढ़ाया कि भारत कोई ताश के पत्तों का महल नहीं है, जिसे कुछ लोगों के उकसावे पर सड़कों पर उपद्रव करके गिरा दिया जाए। भारत दुनिया का सबसे बड़ा, सबसे पुराना और सबसे मजबूत लोकतंत्र है, जहां कानून अपना काम करना बहुत अच्छी तरह जानता है.
- सड़क पर हिंसा बनाम संवैधानिक ढांचा: बांग्लादेश में तख्तापलट करके सरकारें गिराना, तोड़फोड़ करना और सड़कों पर अराजकता फैलाना भले ही वहां की राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा बन चुका हो, लेकिन भारत अपने पवित्र संविधान, अपनी स्वतंत्र और निष्पक्ष अदालतों और अपने चुनाव आयोग के नियमों से चलता है. यहां भीड़ तंत्र का संविधान पर कोई हक नहीं है.
- न्यायपालिका की स्वतंत्रता और देश की सुरक्षा: भारत में उमर खालिद और शरजील इमाम पर कोई आम आरोप नहीं हैं, बल्कि उन पर देश की सुरक्षा को खतरे में डालने जैसे संगीन आरोप हैं. उनका मामला देश की स्वतंत्र न्यायपालिका के सामने पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत विचाराधीन है. जिस शर्जील इमाम ने कभी खुलेआम भारत के पूर्वोत्तर हिस्से को देश के बाकी हिस्सों से काटकर अलग करने की धमकी दी थी, उसे ढाका का एक नेता बड़े गर्व से अपना ‘कॉमरेड’ बता रहा है. इसी से बांग्लादेशी नेता के इरादे साफ जाहिर हैं.

