‘फ्री वर्ल्ड में होगा अगले दलाई लामा का जन्म’, चीन से टकराव पर बोले पेंपा त्सेरिंग

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Dalai Lama reincarnation: केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) के सिक्योंग यानी निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रमुख पेंपा त्सेरिंग ने दलाई लामा के अगले पुनर्जन्म को लेकर चीन के साथ जारी विवाद पर खुलकर बात करते हुए कहा कि अगले दलाई लामा के चयन की प्रक्रिया दलाई लामा के निधन के बाद ही शुरू होगी. इसमें धार्मिक परंपराओं, संकेतों, भविष्यवाणियों और वरिष्ठ लामाओं की भूमिका होगी. पेंपा त्सेरिंग का ये बयान चीन को सीधा मैसेज है, जो इस प्रक्रिया में अपनी भूमिका चाहता है.

पेंपा त्सेरिंग के मुताबिक, दलाई लामा ने पिछले साल स्पष्ट किया था कि उनका पुनर्जन्म होगा और इसकी खोज की जिम्मेदारी गान्देन फोड्रंग ट्रस्ट को दी जाएगी. हालांकि अभी यह तय नहीं है कि अगला दलाई लामा कहां और किस रूप में जन्म लेंगे. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि दलाई लामा ने पहले कई मौकों पर महिला के दलाई लामा बनने की संभावना से भी इनकार नहीं किया है.

चीन क्यों चाहता है भूमिका?

सबसे बड़ा विवाद चीन की भूमिका को लेकर है. तिब्बती सरकार के प्रमुख का कहना है कि चीन सरकार दलाई लामा के पुनर्जन्म की प्रक्रिया पर नियंत्रण चाहती है. पेंपा त्सेरिंग के मुताबिक, चीन की तरफ से कहा जा रहा है कि अगले दलाई लामा की पहचान चीन की मंजूरी के बिना नहीं हो सकती. ऐसे में पेंपा त्सेरिंग का सवाल है कि जो चीनी सरकार पुनर्जन्म की धार्मिक अवधारणा को स्वीकार नहीं करती, वह दलाई लामा के पुनर्जन्म की धार्मिक प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका कैसे निभा सकती है. उनके मुताबिक दलाई लामा का अपना स्पष्ट रुख है कि उनका अगला अवतार किसी फ्री वर्ल्ड में होगा, यानी चीन के नियंत्रण वाले क्षेत्र में नहीं.

पेंचन लामा का उदाहरण

पुनर्जन्म की प्रक्रिया कैसी होगी?

पेंपा त्सेरिंग के मुताबिक, चीन भविष्य में अपने द्वारा चुने गए धार्मिक व्यक्ति को दलाई लामा की पहचान की प्रक्रिया पर प्रभाव डालने के लिए इस्तेमाल कर सकता है. पेंपा त्सेरिंग ने बताया कि दलाई लामा के निधन के बाद उनकी परंपरा के अनुसार, संकेतों और धार्मिक प्रक्रियाओं के आधार पर खोज शुरू होगी. इसमें दिव्य संकेत, वरिष्ठ लामाओं से सलाह, सपनों और धार्मिक दृष्टांतों जैसी चीजों को देखा जा सकता है. उन्होंने मौजूदा दलाई लामा की पहचान की प्रक्रिया का उदाहरण भी दिया. उनके मुताबिक, पिछले जन्म से जुड़ी वस्तुओं को पहचानने और बच्चे की प्रतिक्रियाओं को परखने जैसे कई धार्मिक परीक्षण किए जाते हैं.

चीन के कानूनों को लेकर भी चिंता

इस दौरान पेंपा त्सेरिंग ने चीन के नए एथिनिक यूनिटी लॉ का भी जिक्र किया. उनका आरोप है कि चीन तिब्बत में भाषा, संस्कृति और धर्म को ज्यादा से ज्यादा चीनी व्यवस्था के अनुरूप ढालने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने खास तौर पर स्कूलों में तिब्बती भाषा और संस्कृति के प्रभाव को कम किए जाने और धार्मिक संस्थानों में सिनिसाइजेशन की नीति का मुद्दा उठाया. उनके मुताबिक यही नीति भविष्य में दलाई लामा के पुनर्जन्म की प्रक्रिया को भी प्रभावित करने की कोशिश कर सकती है.
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