El nino: भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर की लहरों में उठ रही भीषण गर्मी के वजह से दक्षिण एशिया खासकर पाकिस्तान को एक विनाशकारी जल संकट में फंसा हुआ है. ऐसे में विश्व मौसम विज्ञान संगठनों, जैसे NOAA, ऑस्ट्रेलियाई मौसम विज्ञान ब्यूरो और ECMWF की रिपोर्ट में पाकिस्तान को लेकर गंभीर खतरे की आशंका जताई जा रही है. इन रिपोर्ट्स में पाकिस्तान में भयानक सूखा और जानलेवा बाढ़ की एक साथ आशंका जताई गई है.
वैश्विक मौसम संगठनों के मुताबिक, अल नीनो 3.4 इंडेक्स में तापमान सामान्य से 1.5°C से अधिक दर्ज किया गया है. यह डेटा सीधे तौर पर एक भीषण ‘अल-नीनो’ के आने की पुष्टि करता है. जलवायु परिवर्तन के इस दौर में अल-नीनो का यह झटका केवल गर्मी बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि यह पाकिस्तान की लाइफलाइन मानी जाने वाली मानसूनी हवाओं और सिंधु नदी जल तंत्र को सीधे तौर पर पंगु बना रहा है.
पाकिस्तान में हालात बहुत खतरनाक स्तर पर जानें की आशंका
ऐसे में रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान के ऊपर कुदरत का भयानक कहर आ सकता है. वहीं, भारत ने पहले ही सिंधु जल संधि को स्थगित कर रखा है, जिससे पाकिस्तान में हालात बहुत खतरनाक स्तर पर जा सकते हैं. दरअसल, सामान्य मानसून के दौरान जमीन तेजी से गर्म होकर एक कम दबाव का क्षेत्र बनाती है जो अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी से भरी मानसूनी हवाओं को लाहौर, रावलपिंडी, सियालकोट और झेलम जैसे शहरों की तरफ खींचती है, लेकिन अल-नीनो के आते ही यह तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो जाता है.
कैसे खतरनाक अल-नीनो की चपेट में आ रहा पाकिस्तान
प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से के अत्यधिक गर्म होता है, जिससे समुद्र के ऊपर एक प्रतिस्पर्धी कम दबाव का क्षेत्र बन जाता है. ऐसे में हवाओ की दिशा में परिवर्तन आ जाता है. यह तंत्र मानसून की नमी को एशियाई उपमहाद्वीप की ओर बढ़ने से रोक देता है, जिससे बंगाल की खाड़ी में चक्रवात बनने की प्रक्रिया सुस्त पड़ जाती है जिससे बारिश में भारी कमी, भीषण लू और अकाल जैसे हालात बन रहे हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, जलवायु से जुड़े दबावों का यह मेल पाकिस्तान के लिए बहुत नाज़ुक समय पर हो रहा है, क्योकि भारत पहले ही सिंधु जल संधि को एकतरफा रूप से रोक चुका है, जिससे नदी के बहाव में और कमी आने का खतरा है और इससे सिंधु सिस्टम पर निर्भर निचले इलाकों के लोगों और खेती की जमीनों पर सीधा खतरा मंडरा रहा है. इसके साथ ही रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि पाकिस्तान का पानी जमा करने का इंफ्रास्ट्रक्चर बहुत कमजोर है. देश के दो मुख्य जलाशय तरबेला और मंगला, जो मुख्य रूप से पनबिजली बनाने के काम आते हैं, ऐसे में पानी का बहाव कम होने से बिजली बनाने की क्षमता और पानी का भंडार, दोनों कम हो जाएंगे.
भारत की सख्ती से तीनतरफा फंसा पाकिस्तान?
रिपोर्ट के अनुसार यह कुदरती आफत पाकिस्तान के लिए ऐसे मोड़ पर आई है जब उसकी जल-सुरक्षा तीन बड़े मोर्चों पर घिरी हुई है….
इंडस वाटर्स ट्रीटी स्थगित- भारत की तरफ से सिंधु जल संधि के निलंबन और बहाव पर नियंत्रण के रणनीतिक रुख ने निचले इलाकों के कृषि क्षेत्रों में पानी की कमी की चिंता बढ़ा दी है.
बांधों का आधारभूत ढांचा कमजोर- पाकिस्तान के दो सबसे प्रमुख जलाशय तरबेला और मंगला मुख्य रूप से जलविद्युत उत्पादन के लिए डिजाइन किए गए थे। पानी की आवक कम होते ही बिजली उत्पादन और सिंचाई दोनों ठप हो जाते हैं।
पिघलते ग्लेशियर- 2001 से 2021 के बीच सिंधु बेसिन में बारहमासी बर्फ का आवरण 25 प्रतिशत तक सिकुड़ चुका है। पिघलते पानी को स्टोर करने के लिए उचित स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है।
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