इस देश में बच्चों को उठा ले जाती है सरकार..! किस वजह से पैरेंट्स को मिलती है इतनी बड़ी सजा?

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Finland: उत्तरी यूरोप में स्थित शांत और विकसित फिनलैंड (Finland) को लगातार कई वर्षों से दुनिया का सबसे खुशहाल देश घोषित किया गया है. 55 लाख की आबादी वाले इस देश में अक्सर ये दावा किया जाता है कि अगर माता-पिता अपने बच्चे को नहीं पढ़ाते या उसकी ठीक से देखभाल नहीं करते, तो सरकार बच्चे को अपने कब्जे में ले लेती है. यह बात सुनने में भले ही चौंकाने वाली लगे, लेकिन सच्चाई इससे थोड़ी अलग और ज्यादा गंभीर है.

फिनलैंड में “Taking into care” प्रक्रिया

कहा जाता है की बच्चें का भविष्य बनाना मां-बाप के हाथ में है. फिनलैंड में “Taking into care” नाम की प्रक्रिया होती है, लेकिन यह कोई आम या छोटी वजहों पर लागू नहीं होती. यह कदम तभी उठाया जाता है, जब बच्चे की सुरक्षा, सेहत या जीवन पर खतरा हो. अगर किसी बच्चे के साथ मार-पीट या किसी भी तरह की शारीरिक हिंसा हो रही हो, तो इसे बेहद गंभीर स्थिति माना जाता है.

जान और मानसिक स्वास्थ्य दोनों खतरे में

ऐसे मामलों में सरकार तुरंत हस्तक्षेप कर सकती है, क्योंकि इससे बच्चे की जान और मानसिक स्वास्थ्य दोनों खतरे में पड़ जाते हैं. बच्चे को सुरक्षित माहौल देना प्राथमिकता होती है, इसलिए उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाते हैं. अगर माता-पिता ड्रग्स या शराब के नशे में रहते हैं और इसके कारण बच्चे की सही देखभाल नहीं हो पा रही है, तो इसे एक गंभीर स्थिति माना जाता है.

शारीरिक और मानसिक विकास पर सीधा असर

ऐसी हालत में बच्चे की सुरक्षा, पोषण और परवरिश प्रभावित होती है, जिसका उसके शारीरिक और मानसिक विकास पर सीधा असर पड़ता है. इसलिए इस तरह के मामलों में संबंधित एजेंसियां हस्तक्षेप कर सकती हैं, ताकि बच्चे को सुरक्षित और बेहतर वातावरण मिल सके. अगर बच्चे को उसकी बुनियादी जरूरतें जैसे पर्याप्त खाना, साफ-सफाई और समय पर मेडिकल केयर नहीं मिल रही हैं, तो इसे गंभीर लापरवाही माना जाता है.

सुरक्षित माहौल देने का फैसला

ऐसी स्थिति में बच्चे का स्वास्थ्य और विकास दोनों प्रभावित होते हैं, इसलिए संबंधित एजेंसियां हस्तक्षेप कर सकती हैं और जरूरत पड़ने पर उसकी कस्टडी लेकर उसे सुरक्षित माहौल देने का फैसला किया जा सकता है. सिर्फ पढ़ाई न कराने पर तुरंत यह सख्त कदम नहीं उठाया जाता. कस्टडी तभी ली जाती है जब बच्चे का समग्र विकास खतरे में हो और परिवार को सुधार के कई मौके दिए जाने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार न आए.

कस्टडी लेना एक आखिरी विकल्प

फिनलैंड में बच्चे की कस्टडी लेना एक आखिरी विकल्प के रूप में ही अपनाया जाता है. इससे पहले सोशल वर्कर्स परिवार को समझाते हैं, उन्हें हर तरह की मदद और सपोर्ट देते हैं और स्थिति सुधारने का पूरा मौका दिया जाता है. अगर इन सभी प्रयासों के बाद भी हालात बेहतर नहीं होते और बच्चे की सुरक्षा या भविष्य खतरे में बना रहता है, तभी सरकार यह सख्त कदम उठाती है.

बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्त कानून

फिनलैंड में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्त कानून जरूर हैं, लेकिन छोटी-छोटी गलतियों पर बच्चे को माता-पिता से अलग नहीं किया जाता. यह कदम सिर्फ तब उठाया जाता है, जब बच्चे की जिंदगी या भविष्य सच में खतरे में हो.

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