Germany: जर्मनी में रहने वाली भारतीय महिला इस समय भीषण हीटवेव से दुखी हो चुकी है. महिला का कहना है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश में 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी झेली है, लेकिन जर्मनी की 33 डिग्री गर्मी उन्हें कहीं ज्यादा परेशान कर रही है. बता दें कि पूरा यूरोप इस समय भीषण हीटवेव की चपेट में है. महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
तेज धूप के कारण बाहर निकलना मुश्किल
महिला ने बताया कि जिम से घर लौटते समय तेज धूप और गर्म हवा के कारण बाहर निकलना मुश्किल हो गया. उन्होंने कहा कि 33°C तापमान पर ही हीट वार्निंग जारी कर दी गई है और लोग घरों में रहने को मजबूर हैं. आम दिनों में भीड़ से भरा रहने वाला उनका जिम भी लगभग खाली था. विशेषज्ञों के अनुसार, केवल तापमान देखकर गर्मी की तुलना नहीं की जा सकती. गर्मी कितनी महसूस होगी, यह कई दूसरी चीजों पर भी निर्भर करता है.
हर जगह एयर कंडीशनर नहीं होते
पहली वजह यह है कि यूरोप के अधिकांश घर और दफ्तर ठंडे मौसम के लिए बनाए गए हैं. वहां भारत की तरह हर जगह एयर कंडीशनर नहीं होते. इसलिए बाहर के साथ-साथ घरों के अंदर भी गर्मी बनी रहती है. दूसरी वजह है लंबे दिन. गर्मियों में यूरोप में सूरज लगभग 15 से 16 घंटे तक रहता है. लगातार धूप के कारण इमारतें और सड़कें देर तक गर्म रहती हैं और रात में भी तापमान ज्यादा नहीं गिरता.
तापमान कई इलाकों में सामान्य
तीसरी वजह यह है कि यूरोप के लोग इतनी गर्मी के आदी नहीं हैं. भारत में 40 से 45°C तापमान कई इलाकों में सामान्य माना जाता है. भारत में लोग अपने घर, कपड़े और दिनचर्या उसी हिसाब से ढाल चुके हैं. यूरोप में 30 से 35°C भी असामान्य माना जाता है. इसके अलावा इस समय यूरोप में ‘ओमेगा ब्लॉक’ नाम का उच्च दबाव (हाई-प्रेशर) मौसम तंत्र बना हुआ है. यह गर्म हवा को कई दिनों तक एक ही क्षेत्र में रोक देता है, जिससे हीटवेव लगातार बनी रहती है.
1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें
यूरोप में यह गर्मी अब गंभीर रूप ले चुकी है. रिपोर्टों के अनुसार 21 जून के बाद से 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं. अकेले फ्रांस में लगभग 1,000 अतिरिक्त मौतों की सूचना है. वहीं जर्मनी में जंगलों में आग, रेलवे ट्रैक और सड़कों को नुकसान तथा आपातकालीन सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है.
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