Global Flight Crisis: दुनिया भर में हवाई यात्रा एक बार फिर गंभीर संकट का सामना कर रही है. सोमवार को भी सैकड़ों अतिरिक्त उड़ानें रद्द कर दी गईं, जिससे वैश्विक हवाई यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया है. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई के बाद बने हालात ने लाखों यात्रियों को प्रभावित किया है और हजारों लोग अलग-अलग देशों के एयरपोर्ट्स पर फंसे हुए हैं. रिपोर्ट के अनुसार शुरुआती आंकड़ों में सोमवार सुबह तक 1,239 उड़ानें पहले ही रद्द हो चुकी थीं.
मध्य पूर्व का एयरस्पेस लगभग खाली
इससे पहले शनिवार को लगभग 2,800 और रविवार को 3,156 उड़ानें रद्द की गई थीं. ये आंकड़े फ्लाइट ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म फ्लाइट अवेयर ने जारी किए. वहीं फ्लाइट रेडार 24 के अनुसार सोमवार तक ईरान, इराक, कुवैत, इज़राइल, बहरीन, यूएई और कतर के ऊपर का हवाई क्षेत्र लगभग खाली नजर आ रहा था. सबसे बड़ा झटका मध्य पूर्व के प्रमुख हवाई अड्डों को लगा है. दुबई, जो दुनिया का सबसे व्यस्त अंतरराष्ट्रीय हब माना जाता है, तीसरे दिन भी बंद रहा. अबू धाबी और दोहा के एयरपोर्ट भी या तो पूरी तरह बंद रहे या बेहद सीमित सेवाओं के साथ संचालित हुए.
एयरलाइंस पर भारी दबाव
कोविड-19 महामारी के बाद इसे विमानन उद्योग के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है. हालात के चलते एयरलाइंस कंपनियों पर भी भारी दबाव देखने को मिला. एमिरेट्स ने सोमवार को यूएई समयानुसार दोपहर 3 बजे तक दुबई से आने-जाने वाली सभी निर्धारित उड़ानें निलंबित कर दीं, जबकि एतिहाद एयरवेज ने अबू धाबी के लिए दोपहर 2 बजे तक अपनी सेवाएं रोक दीं. वहीं कतर के हवाई क्षेत्र के बंद होने के कारण कतर एयरवेज को उड़ान संचालन पूरी तरह स्थगित करना पड़ा. इन तीनों प्रमुख एयरलाइंस ने मिलकर सैकड़ों उड़ानें रद्द कर दीं.
भारत पर भी पड़ा असर
संकट का असर भारत पर भी पड़ा. एयर इंडिया ने रविवार को दिल्ली, मुंबई और अमृतसर से यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली कई उड़ानें रद्द कर दीं. यूरोप से लेकर एशिया तक कनेक्टिंग फ्लाइट्स बाधित होने से बाली से फ्रैंकफर्ट तक यात्री फंसे हुए हैं. रविवार को दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से उड़ान भरने वाली 100 फ्लाइट्स रद्द की गईं. दोनों पक्षों की ओर से आ रहे बयान खास उत्साहवर्धक नहीं हैं. ताबड़तोड़ हमले हो रहे हैं. ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरों से तनाव और बढ़ गया है. विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह अनिश्चितता लंबी खिंचती है तो विमानन उद्योग को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
वैश्विक विमानन पर बढ़ता खतरा
संघर्ष के लेबनान तक फैलने और बेरूत के दक्षिणी हिस्सों में हवाई हमलों के बाद क्षेत्र का बड़ा भाग बंद हवाई क्षेत्र में बदल गया है. कई पायलट और क्रू अलग-अलग देशों में फंसे हुए हैं, जिससे हवाई क्षेत्र खुलने के बाद भी उड़ान सेवाओं को तुरंत सामान्य करना मुश्किल हो सकता है. कुल मिलाकर यह संकट अब सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भू-राजनीतिक तनाव, बंद एयरस्पेस और बढ़ती अनिश्चितता ने वैश्विक हवाई यात्रा को फिर से अस्थिर कर दिया है.
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