H-1B वीजा ट्रंप का बड़ा एक्शन, और एक साल के लिए बढ़ा 1 लाख डॉलर फीस वाला आदेश

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

H 1B Visa: अमेरिका में नौकरी करने का सपना देख रहे लाखों विदेशी पेशेवरों, कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर है. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर शुल्क लगाने से जुड़े आदेश की अवधि एक साल और बढ़ा दी है. फिलहाल ये मामला अभी अदालत में है, लेकिन इस फैसले ने टेक कंपनियों, विदेशी कर्मचारियों और अमेरिकी इमिग्रेशन नीति को लेकर बहस फिर तेज कर दी है.

बता दें कि H-1B वीजा कार्यक्रम का सबसे अधिक उपयोग भारतीय आईटी और तकनीकी पेशेवरों को अमेरिका में नियुक्त करने के लिए किया जाता है. ऐसे में ट्रंप के इस फैसले का असर भारतीय प्रतिभाओं, अमेरिकी कंपनियों और वैश्विक भर्ती बाजार पर पड़ सकता है.

एक साल और बढ़ी आदेश की अवधि

रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B गैर-आप्रवासी वीजा पर 1 लाख डॉलर शुल्क लगाने से जुड़े कार्यकारी आदेश की समय सीमा को और एक साल के लिए बढ़ा दिया है. बता दें कि पहली बार यह आदेश सितंबर 2025 में जारी किया गया था और इसकी अवधि इस महीने समाप्त होने वाली थी, लेकिन इसे अब अगले वर्ष तक बढ़ा दिया गया है.

ट्रंप लंबे समय से कर रहे हैं विरोध

अमेरिकी राष्ट्रपति लंबे समय से H-1B वीजा कार्यक्रम की आलोचना करते रहे हैं. उनका कहना है कि कुछ कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए इस कार्यक्रम का उपयोग करती हैं. इसी वजह से ट्रंप प्रशासन मौजूदा 2,000 से 5,000 डॉलर के शुल्क को स्थायी रूप से बढ़ाकर 1 लाख डॉलर करना चाहता है. हालांकि इस शुल्क वृद्धि को कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

दरअसल, जून में एक संघीय न्यायाधीश ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए बढ़े हुए शुल्क को अवैध बताते हुए इसकी वसूली पर रोक लगा दी थी. वहीं, इस फैसले की समीक्षा बोस्टन स्थित अपीलीय अदालत कर रही है. जबकि एक अन्य अदालत अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स की तरफ से दायर चुनौती से जुड़े मामले पर भी विचार कर रही है.

क्या है H-1B वीजा कार्यक्रम?

अमेरिकी कांग्रेस द्वारा साल 1990 में शुरू किया गया यह वीजा कार्यक्रम विशेष रूप से उन टेक कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो भारत और चीन से प्रतिभाशाली पेशेवरों की भर्ती करना चाहती हैं. इस वीजा कार्यक्रम के तहत अमेरिकी कंपनियां विदेशी कुशल पेशेवरों को नौकरी पर रख सकती हैं. ऐसे में तकनीकी, इंजीनियरिंग, आईटी, वित्तीय सेवाओं और अन्य विशेषज्ञ क्षेत्रों में काम करने वाले हजारों पेशेवर हर साल इस वीजा के जरिए अमेरिका जाते हैं. यह कार्यक्रम विशेष रूप से भारतीय और चीनी पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है.

किन लोगों पर लागू नहीं होगा आदेश

बता दें कि यह आदेश उन विदेशी नागरिकों पर लागू नहीं होता जो पहले से छात्र वीजा पर अमेरिका में मौजूद हैं और बाद में H-1B वीजा प्राप्त करते हैं. इसके अलावा, मौजूदा H-1B वीजा के नवीनीकरण पर भी यह नियम लागू नहीं किया गया है. इसी कारण नए आवेदकों और पहली बार वीजा प्रायोजन कराने वाली कंपनियों पर इसका प्रभाव अधिक माना जा रहा है.

भारत पर क्या होगा इसका असर

H-1B वीजा का सबसे अधिक लाभ भारतीय आईटी और तकनीकी पेशेवरों को मिलता है. जानकारो का मानना है कि यदि भविष्य में 1 लाख डॉलर शुल्क पूरी तरह लागू होता है, तो अमेरिकी कंपनियों की भर्ती लागत बढ़ सकती है और इसका असर भारतीय प्रतिभाओं की मांग पर पड़ सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, वीजा आवेदकों की जांच और प्रक्रिया में किए गए बदलावों का असर कंपनियों की भर्ती और विस्तार योजनाओं पर भी पड़ा है. H-1B वीजा का अधिक उपयोग करने वाली कुछ बड़ी कंपनियां, जैसे गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट, अब भारत में अपने परिचालन और निवेश को बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रही हैं.

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