Dhaka: बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर एक और चिंताजनक घटना सामने आई है. मयमनसिंह जिले के बेगुनबाड़ी इलाके में 50 साल के निरंजन चंद्र सूत्रधार की धारदार हथियार से वार कर उसकी हत्या कर दी गई. इसके बाद उसके शव को स्लूइस गेट के पास ड्रम में डाल दिया. ड्रम के अंदर शव तैरता देख हडकंप मच गया. पुलिस के मुताबिक निरंजन साझेदारी में मयमनसिंह के अठारबारी बिल्डिंग इलाके में एक ज्वैलरी शॉप चलाते थे.
हत्या किसने की या इसके पीछे क्या मकसद था
बांग्लादेश के प्रमुख बंगाली अखबार ‘द डेली इत्तेफाक’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस अभी तक यह पता नहीं लगा पाई है कि निरंजन की हत्या किसने की या इसके पीछे क्या मकसद था. शुक्रवार तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई थी. कोतवाली मॉडल पुलिस स्टेशन के ओसी मुहम्मद शिबिरुल इस्लाम के अनुसार, मृतक के सिर और छाती पर धारदार हथियार से चोट के निशान थे. पुलिस का मानना है कि शव को ड्रम में डालकर पानी में फेंकने से पहले ही निरंजन की हत्या कर दी गई थी.
टोकन के जरिए संस्था से संपर्क
पुलिस ने बताया कि ड्रम से मिले शव की पैंट की जेब से मयमनसिंह हिंदू कोऑपरेटिव क्रेडिट यूनियन लिमिटेड का एक टोकन मिला. टोकन के जरिए संस्था से संपर्क करने पर पुलिस मृतक की पहचान निरंजन चंद्र के तौर पर कर पाई. बाद में उनकी पत्नी सुमिता रानी सूत्रधार और बेटे जॉय सूत्रधार ने शव की पहचान की. ‘द डेली इत्तेफाक’ ने कोतवाली मॉडल पुलिस स्टेशन के सब-इंस्पेक्टर (एसआई) रूहुल अमीन के हवाले से कहा कि टोकन मिलने के बाद मयमनसिंह हिंदू कोऑपरेटिव क्रेडिट यूनियन लिमिटेड से संपर्क किया गया.
निरंजन की पहचान करने में मदद
संस्था के लोगों ने टोकन देखकर निरंजन की पहचान करने में मदद की. बाद में परिवार से संपर्क करके उनकी पहचान की पुष्टि की गई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुधवार सुबह बेगुनबाड़ी इलाके में नहर के पास पानी में एक ड्रम तैरता हुआ देखकर स्थानीय लोगों ने अधिकारियों को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस ने शव बरामद किया. इस हालिया घटना ने पूरे बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों में चिंताजनक बढ़ोतरी को उजागर किया है.
अवामी लीग ने कई सवाल भी उठाए
यह सिलसिला मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली पिछली अंतरिम सरकार के दौरान शुरू हुआ था और मौजूदा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) प्रशासन के तहत भी जारी है. हाल ही में इसे लेकर अवामी लीग ने कई सवाल भी उठाए थे. 2001 से 2006 तक बीएनपी-जमात-ए-इस्लामी गठबंधन के पांच साल के शासन को याद करते हुए आरोप लगाया कि उस दौरान देश भर में अल्पसंख्यक समुदायों पर जो अत्याचार हुए थे, वे अब 2026 में फिर से देखने को मिल रहे हैं.
पूरे परिवार की हत्या का जिक्र
पार्टी ने कहा कि मंदिरों पर हमले, घरों में आग लगाना, जमीन पर कब्जा करना, महिलाओं के साथ बर्बर यौन हिंसा और अनगिनत हिंदुओं को बांग्लादेश छोड़ने के लिए मजबूर करना यह सब आज 2026 में फिर से हमारी आंखों के सामने आ रहा है. रंगपुर शहर में रिटायर्ड हिंदू शिक्षक गणपति चक्रवर्ती और उनके पूरे परिवार की हत्या का जिक्र करते हुए पार्टी ने कहा कि इस घटना के बाद सत्ताधारी बीएनपी सरकार की निष्क्रियता धार्मिक अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के उस बड़े पैटर्न को दिखाती है, जो पिछली यूनुस-नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के समय से ही जारी है.
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