UN: भारत ने ‘अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन’ (सीसीआईटी) को जल्द अपनाने की मांग की है. इसके साथ ही पहलगाम आतंकवादी नरसंहार के लिए जिम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के महत्व पर जोर दिया. भाजपा सांसद बिप्लब कुमार देब ने मंगलवार को कहा कि पिछले साल पहलगाम हमले में 26 बेगुनाह नागरिक मारे गए थे. सीमा-पार आतंकवाद के दोषियों, आयोजकों, फाइनेंसरों और प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराना जरूरी है.
सीमापार आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ता से दोहराया
पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी. अंतर्राष्ट्रीय कानूनी मामलों से संबंधित महासभा की छठी समिति में बोलते हुए बिप्लब कुमार देब ने सीमापार आतंकवाद के खिलाफ अपने लोगों की रक्षा करने के भारत के अधिकार को दृढ़ता से दोहराया. भारत ने कहा है कि पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का राज्य प्रायोजक है और पहलगाम हमले के बाद उसने वहां उसकी सुरक्षा में संचालित आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की.
सीसीआईटी को जल्द अपनाना जरूरी
देब ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे को मजबूत करने के लिए सीसीआईटी को जल्द अपनाना जरूरी है, जो 30 साल से अटका हुआ है. 1996 में भारत की ओर से प्रस्तावित सीसीआईटी को कुछ देशों ने रोक दिया है. ये देश ‘अच्छे आतंकवादियों’ और ‘बुरे आतंकवादियों’ के बीच भेदभाव करते हैं. उनका तर्क है कि इसमें ‘स्वतंत्रता सेनानियों’ को शामिल नहीं किया जाना चाहिए, जिन्हें वे पहली श्रेणी में रखते हैं. देब ने कहा कि आतंकवाद में ‘अच्छा’ व ‘बुरा’ अंतर नहीं किया जा सकता है और नागरिकों को निशाना बनाने का कोई औचित्य नहीं हो सकता है.
नई तकनीकों का इस्तेमाल
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव, वह त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री हैं और महासभा में भारत के प्रतिनिधिमंडल के सांसदों में से एक हैं. देब ने ध्यान दिलाया कि भारत को इस बात की चिंता है कि आतंकवादियों की ओर से भर्ती, कट्टरपंथ फैलाने, प्रोपेगैंडा, ऑपरेशन की योजना बनाने और आतंकवादी वित्तपोषण के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं.
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