चीन की उड़ी नींद! ये कंपनी यूपी की धरती से निकालेगी रेयर अर्थ एलिमेंट्स, सरकार से मिला…

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India-China : दुनिया के सबसे बड़े उत्‍पादक रेयर अर्थ एलिमेंट्स के निर्यात पर चीन ने अप्रैल में प्रतिबंध लगा दिया था, बता दें कि चीन के प्रतिबंध लगाने से भारत समेत कई बड़े देशों पर इसका असर पड़ा.  इसका इस्‍तेमाल मुख्य तौर पर इलेक्ट्रिक व्हीकल और प्रमुख ऑटो पार्ट्स को बनाने में किया जाता है.

भारत ने बढ़ाई उत्‍पादन में तेजी

रेयर अर्थ एलिमेंट्स उत्‍पादक के निर्यात पर चीन के प्रतिबंध लगानें पर भारत ने इसके उत्पादन में और भी तेजी बढ़ा दी है. इसी बीच देश की लीडिंग माइनिंग कंपनी वेदांता की सहायक कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड को यूपी सरकार से दुर्लभ खनिजों की माइनिंग करना का ठेका मिला है.

ऐसे मे यूपी के सोनभद्र जिले में 210.01 हेक्टेयर में फैले नवाटोला-लाबंद रेयर अर्थ एलिमेंट  ब्लॉक पर माइनिंग करने के लिए कंपोजिट लाइसेंस देने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट प्राप्त हुआ है.

हिंदुस्तान जिंक को पसंदीदा बोलीदाता के रूप में किया नामित

इस दौरान इस बिड को जीतने पर हिंदुस्तान जिंक के CEO अरुण मिश्रा का कहना है कि “हिंदुस्तान जिंक के पास रेयर अर्थ एलिमेंट्स में गहन विशेषज्ञता है. यह अधिग्रहण तेजी से आर्थिक विकास के लिए लक्ष्यों का समर्थन करने के लिए महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में हमारे रणनीतिक कदम के अनुरूप है.” ऐसे में 2015 के नियम 18(1) के तहत मिनरल ऑक्शन रूल हिंदुस्तान जिंक को लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया गया. इसके साथ ही सरकार ने हिंदुस्तान जिंक को पसंदीदा बोलीदाता के रूप में नामित किया.

भारत के पास मौजूद रेयर अर्थ एलिमेंट्स का भंडार

दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश भारत है. जिसके पास रेयर अर्थ एलिमेंट्स का भंडार मौजूद है. बता दें कि चीन का तुलना में हिंदुस्तान के पास 6.9 बिलियन मीट्रिक टन रेयर अर्थ एलिमेंट्स का भंडार है. इस दौरान उत्पादन के मामले में भारत देश पांचवें नंबर पर हैं. लेकिन समय के साथ धीरे-धीरे दुर्लभ खनिज का उत्पादन देश में बढ़ रहा है. जानकारी के मुताबिक, रेयर अर्थ एलिमेंट्स चीन का सबसे बड़ा भंडार है लेकिन अब भारत ने इसे लेकर चीन पर अपनी निर्भरता कम कर दी है.

कंपनियों को आर्थिक मदद देगी सरकार

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार सरकार रेयर अर्थ एलिमेंट्स में वैश्विक स्तर पर भारत की 10 फीसदी हिस्सेदारी सुनिश्चित करना चाहती है. इसके साथ ही इस अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार VGF (Viability Gap Funding) इंसेंटिव के तहत माइनिंग कंपनियों को आर्थिक मदद और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी मुहैया कराएगी.

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