New Delhi: होर्मुज जलडमरूमध्य में आई बाधाओं के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. देश की प्रमुख तेल एवं गैस कंपनी ONGC ने कर्नाटक के मंगलूरु में 1.75 मिलियन टन (करीब 1.3 करोड़ बैरल) क्षमता का नया रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाने की योजना की घोषणा की है. भारत सरकार भविष्य में ओडिशा के चांदीखोल में लगभग 4 मिलियन टन और पादुर में 2.5 मिलियन टन क्षमता के नए रणनीतिक तेल भंडार विकसित करने की योजना पर भी काम कर रही है.
भंडारण क्षमता 3 करोड़ बैरल तक बढ़ाने की घोषणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस वर्ष यूएई यात्रा के दौरान ADNOC ने भारत में अपनी कच्चे तेल की भंडारण क्षमता 3 करोड़ बैरल तक बढ़ाने की योजना की घोषणा की थी. साथ ही फुजैराह में भी भारत के लिए संभावित रणनीतिक भंडारण पर सहयोग की बात कही गई थी. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक और उपभोक्ता है. ईरान युद्ध के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में अवरोध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई थी.
भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर
दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का परिवहन इसी समुद्री मार्ग से होता है, जिससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ा. ONGC ने शेयर बाजार को दी जानकारी में कहा कि वह राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए इस नए भंडार के व्यावसायिक उपयोग की अनुमति केंद्र सरकार से मांगेगी. भारत में फिलहाल मंगलूरु, पादुर और विशाखापत्तनम में कुल 5.33 मिलियन टन क्षमता वाले रणनीतिक तेल भंडार मौजूद हैं.
यूएई की ADNOC को लीज पर दी
इनका संचालन सरकारी कंपनी इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPRL) करती है. मंगलूरु स्थित मौजूदा 1.5 मिलियन टन क्षमता वाले भंडार का आधा हिस्सा मंगलूरु रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) के पास है, जबकि शेष क्षमता यूएई की ADNOC को लीज पर दी गई है.
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