New Delhi: उत्तरी अरब सागर में भारतीय और पाकिस्तानी नौसेना के युद्धपोतों के बीच हुई टक्कर के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव गहरा गया है. पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि भारतीय नौसेना ने उसके विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में उकसावे वाली कार्रवाई की, वहीं भारतीय पक्ष के अनुसार नियमित निगरानी पर तैनात भारतीय युद्धपोत की ओर पाकिस्तानी जहाज तेजी से और खतरनाक तरीके से आया, जिससे दोनों के बीच टक्कर (संपर्क) हो गई.
राजनयिकों को तलब कर कड़ा विरोध
घटना के बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के प्रभारी राजदूत (चार्ज डी’अफेयर्स) को तलब कर आधिकारिक विरोध पत्र सौंपा. पाकिस्तान का कहना है कि उनकी नौसेना द्विवार्षिक ‘सीपार्क-26’ अभ्यास कर रही थी. इसी दौरान भारतीय नौसैनिक पोत ने खतरनाक निकटता में आकर आक्रामक युद्धाभ्यास किया, जिससे दोनों पोतों के बीच टक्कर हुई.
द्विपक्षीय समझौते का सीधा उल्लंघन
पाकिस्तान ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों और सैन्य अभ्यासों की पूर्व सूचना से जुड़े 1991 के द्विपक्षीय समझौते का सीधा उल्लंघन करार दिया है. नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग भी भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के समक्ष यह विरोध दर्ज कराएगा. दूसरी ओर नई दिल्ली में भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी पाकिस्तानी उच्चायोग के कार्यवाहक प्रमुख को तलब कर कड़ा विरोध जताया. भारतीय रक्षा और कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, भारतीय युद्धपोत अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नियमित निगरानी पर था.
अंतरराष्ट्रीय नेविगेशन नियमों की अनदेखी
पाकिस्तानी जहाज ने सुरक्षित दूरी बनाए रखने के अंतरराष्ट्रीय नेविगेशन नियमों की अनदेखी करते हुए तेज गति से भारतीय जहाज की दिशा पकड़ी, जिससे यह टक्कर हुई. भारत और पाकिस्तान ने अप्रैल 1991 में सैन्य अभ्यासों, युद्धाभ्यासों और सैनिकों की आवाजाही की पूर्व सूचना पर द्विपक्षीय समझौता किया था. इस समझौते का मुख्य उद्देश्य अनजाने में टकराव, गलतफहमी या तनाव को बढ़ने से रोकना है. इस समझौते का आर्टिकल-10 विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा और नौसैनिक गतिविधियों के आचरण को नियंत्रित करता है.
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