India US Trade Deal: अमेरिका और भारत व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से कुछ हफ्ते ही दूर हैं. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को अमेरिकी सांसदों को यह जानकारी दी है. हाउस की विदेश संबंधी मामलों की समिति को जवाब देते हुए रुबियो ने कहा कि “हमें उम्मीद है कि हमें लगता है कि हम इस काम को पूरा करने के करीब हैं और इसे अंतिम रूप देने में बस कुछ ही हफ्ते बाकी हैं. दोनों पक्ष इसे पूरा होते देखना चाहते हैं.”
अमेरिकी विदेश मंत्री ने बार-बार भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया. उन्होने कहा कि हालिया भारत यात्रा के दौरान उन्होंने QUAD समूह के अपने समकक्षों के साथ भी चर्चा की. बता दें कि इस समूह में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं.
QUAD को बताया अहम गठबंधन
इस दौरान रुबियो ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्वाड को एक महत्वपूर्ण गठबंधन बताया. उन्होने कहा कि इस साल ग्रुप की एक मीटिंग करने की कोशिश चल रही है. क्वाड हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ एक महत्वपूर्ण गठबंधन है. हमने इस समूह की कई बैठकें की हैं, जिनमें पिछले हफ्ते भारत में हुए बैठक और इस साल के अंत में होने वाली एक और बैठक शामिल है.
QUAD नेताओं की बैठक की तैयारी
मार्को रुबियो ने कहा कि “हमें उम्मीद है कि इस साल नेताओं की बैठक होगी. शायद इस इलाके में होने वाली किसी दूसरी ग्लोबल मीटिंग के दौरान, लेकिन फिर भी एक मीटिंग जरूर होगी.” विदेश मंत्री ने बताया कि यह कोई अलग बैठक नहीं होगी, बल्कि उसी का हिस्सा होगी. आप जानते हैं कि जब वे सभी एक ही समय पर वहां मौजूद होंगे, तो यह ज्यादा आसान होगा.”
फिर किया भारत-पाकिस्तान युद्ध रोकने का जिक्र
कमेटी को दिए एक लिखित बयान में उन्होंने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रोकने का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रोकने में विदेश विभाग की कामयाबी बताया. उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान एक पूरी तरह से युद्ध की कगार पर थे. विदेश विभाग और मैं खुद उस टकराव, दो परमाणु शक्तियों के बीच होने वाले युद्ध, को कम करने और उसे खत्म करने में शामिल थे.
बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले साल 7 मई से 10 मई के बीच एक छोटा लेकिन तीखा सैन्य टकराव हुआ था. अमेरिकी राष्ट्रपति ने पहले कई बार इस युद्ध को रोकने का क्रेडिट खुद को दिया है, जिसे भारत ने बार-बार खारिज किया है. भारत ने हर बार कहा है कि मई की शुरुआत में हुआ सैन्य टकराव दोनों देशों के बीच हुई अधिकारियों की बातचीत से रुका था और इसमें किसी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं थी.