इस मुस्लिम देश ने की अमेरिका की बेइज्जती! ट्रंप के दूत से मिलने से किया इनकार

Iran and America : काफी लंबे समय से ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध चल रहा है. ऐसे में ईरान के खिलाफ जंग छेड़ने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की फजीहत कम होने के नाम नहीं ले रही है. बता दें कि ग्रीनलैंड को हथियाने का यूरोपीय देशों ने विरोध किया तो तेहरान के साथ छिड़े युद्ध में नाटो भी साथ देने से इनकार कर चुका है. बताया जा रहा है कि अब एक छोटे से मुस्लिम देश ने भी अमेरिका को आंखें दिखाई हैं और यूएस राजदूत को बिना मुलाकात किए बैरंग लौटा दिया.

US राजदूत से नहीं की मुलाकात

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार पिछले महीने 23 मार्च को डोनाल्ड ट्रम्प के करीबी और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर मालदीव की यात्रा पर गए थे. बता दें कि वहां उनकी मुलाकात मालदीव के मंत्रियों से तो हुई, लेकिन राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने आखिरी वक्त पर उनसे मिलने से मना कर दिया. साथ ही जब राजदूत ने दोबारा मिलने का समय मांगा तो मालदीव सरकार ने ‘प्राइवेट मीटिंग’ का प्रस्ताव दिया, जिसे अमेरिकी राजदूत ने साफतौर पर ठुकरा दिया और बिना राष्ट्रपति से मिले ही दिल्ली लौट आए.

राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू के साथ एक निजी बैठक का प्रस्ताव

इस मामले को लेकर ये भी बताया गया कि जब अमेरिकी राजदूत ने राजनयिक चैनलों के माध्यम से मुइज़्ज़ू के ऑफिस से मीटिंग पर दोबारा विचार करने का अनुरोध किया तो मालदीव की ओर से राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू के साथ एक निजी बैठक का प्रस्ताव रखा गया. बता दें कि अमेरिकी दूत ने उनके इस प्रस्‍ताव को अस्वीकार कर दिया और राष्ट्रपति से बिना मुलाकात किए दिल्ली के लिए रवाना हो गए.

यह कदम उठाने की वजह

मीडिया रिपोर्ट के दौरान मालदीव राष्ट्रपति अमेरिका और इजरायल के ईरान के खिलाफ शुरू की गई जंग के खिलाफ हैं और इसी के चलते उन्होंने यह कदम उठाया. इतना ही नही बल्कि इस बात की भी चर्चा है कि वह बाहरी दबाव से बचने के लिए आजकल किसी से मिल नहीं रहे हैं.

जनता ने वोट देकर प्रस्ताव को किया खारिज

जानकारी के मुताबिक, मुइज़्ज़ू की वर्तमान में लोकप्रियता तेजी से गिर रही है. हालिया नगर निगम चुनावों में उनकी पार्टी (PNC) को करारी हार मिली है. साथ ही विपक्षी पार्टी (MDP) ने सभी 5 मेयर पदों पर जीत हासिल की है. ऐसे में राष्ट्रपति चाहते थे कि संसदीय और राष्ट्रपति चुनाव एक साथ हों, लेकिन मालदीव की 60 फीसदी जनता ने वोट देकर उनके इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया. बता दें कि मालदीव इस समय भारी कर्ज में डूबा हुआ है और उसकी आर्थिक हालत बहुत खराब है.

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